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छह संदिग्ध छात्र पुलिस हिरासत में

8 वर्ष पहले
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नगर संवाददाता - ग्वालियर
पुलिस ने गुरुवार की रात गजराराजा मेडिकल कॉलेज के छह छात्रों को हिरासत में ले लिया। ये छात्र वर्ष 2010 की पीएमटी में सिलेक्ट हुए थे। मेडिकल कॉलेज की जांच कमेटी ने इन्हें संदिग्ध माना था और इसके बाद झांसी रोड थाने में इनके खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया था। प्री मेडिकल टेस्ट-2010 में सिलेक्ट हुए छात्रों के अंगूठे के निशान भी लिए गए थे। ये निशान पुलिस की जांच में महत्वपूर्ण साबित हुए। इस बैच के छात्रों के अंगूठे के निशान लेकर स्थानीय फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट से जांच कराई गई। एएसपी वीरेंद्र जैन ने बताया कि गुरुवार को हुई जांच में इन छात्रों के अंगूठे के निशान मैच नहीं हुए। पकड़े गए छात्रों में प्रीपीजी के विशाल यादव, देशराज, संदीप लहारिया, रजनीकांत, राय सिंह एवं एक अन्य शामिल है।
इनमें से दो एमबीबीएस छात्र संदीप लहारिया, देशराज गुर्जर और पीजी छात्र विशाल यादव को शुक्रवार को न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया गया। इनसे पूछताछ के दौरान खुलासा हुआ कि संदिग्ध छात्रों की जांच भले ही वर्ष 2006 से की जा रही है लेकिन लगभग पंद्रह साल से रुपए लेकर मेडिकल छात्रों का एडमिशन कराने वाला रैकेट सक्रिय था। इस रैकेट के जरिए एडमिशन पाए कुछ छात्र डॉक्टर बन चुके हैं।
बढ़ सकती है संदिग्ध छात्रों की सूची: कॉलेज में कुछ ऐसे छात्र-छात्राएं हैं जो अभी तक संदिग्ध की सूची में नहीं आए हैं लेकिन पकड़े गए छात्रों ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने भी फर्जी तरीके से प्रवेश लिया है। इससे अब संदिग्ध छात्रों की सूची लंबी हो सकती है और कॉलेज की जांच कमेटी पर भी आंच आ सकती है। एक आरोपी विशाल यादव की पत्नी का एडमिशन भी फर्जी तरीके से मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2010 में हुआ था लेकिन जांच कमेटी ने इसे क्लीन चिट दी।
गिरोह से जुड़े एक दर्जन की तलाश: प्रारंभिक तौर पर पुलिस के हाथ आए छात्रों से पूछताछ के बाद पुलिस को गिरोह से जुड़े एक दर्जन लोगों के बारे में जानकारी मिली है, इसमें एक छात्र एमबीबीएस कर चुका है तथा एक रिटायर्ड पुलिस अफसर का रिश्तेदार भी है। इसके अलावा रैकेट से जुड़े भोपाल के कुछ लोगों के नाम भी सामने आए हैं। इन सभी तलाश में पुलिस पार्टियां रवाना कर दी गई हैं।