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पांच लाख में १५ साल से बना रहे थे डॉक्टर

8 वर्ष पहले
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ग्वालियर. जीआरएमसी के तीन संदिग्ध छात्रों के पकड़े जाने और आधा दर्जन लोगों से पूछताछ के बाद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। दरअसल, कॉलेज में कुछ ऐसे छात्र-छात्राएं हैं, जो अभी तक संदिग्ध की सूची में नहीं आए हैं। इससे अब संदिग्ध छात्रों की सूची लंबी हो सकती है और कॉलेज की जांच कमेटी पर भी आंच आ सकती है।

एक आरोपी विशाल यादव की पत्नी का एडमिशन भी फर्जी तरीके से मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2010 में हुआ था। पूछताछ में पता चला कि गिरोह पिछले १५ साल से सक्रिय है। ये लोग पांच लाख रुपए में पेपर आउट कराकर फर्जी तरीके से छात्रों को पीएमटी पास करा रहे थे।

गुरुवार रात पुलिस ने छह मेडिकल छात्रों को हिरासत में लिया था। इनमें से एमबीबीएस छात्र संदीप लहारिया, देशराज गुर्जर और पीजी छात्र विशाल यादव से पूछताछ के दौरान खुलासा हुआ कि संदिग्ध छात्रों की जांच भले ही वर्ष 2006 से की जा रही है, लेकिन लगभग १५ साल से रुपए लेकर मेडिकल छात्रों का एडमिशन कराने वाला रैकेट सक्रिय था। इस रैकेट के जरिए कुछ छात्र डॉक्टर बन चुके हैं।

पत्नी का भी फर्जी एडमिशन: एक छात्र ने पुलिस को बताया था कि विशाल यादव ने पांच लाख रुपए में उसे पेपर आउट कराया था। पुलिस को विशाल ने बताया कि उसकी पत्नी प्रियंका भी जीआरएमसी से एमबीबीएस कर रही है। इसका एडमिशन भी फर्जी तरीके से हुआ है। इस आधार पर पुलिस अब इसकी पत्नी के साथ कुछ अन्य छात्रों का रिकॉर्ड भी तलब कर रही है।

विशाल के भतीजे अजितेश का रिकॉर्ड भी पुलिस तलब कर रही है। इसका नाम भी संदिग्ध छात्रों में है। दूसरे छात्र देशराज के अनुसार उसकी जगह फर्जी परीक्षार्थी बैठा था। इसके लिए उसने सीनियर छात्र चांद खां के जरिए डीलिंग की थी। पुलिस ने चांद खां की तलाश में मुरैना में दबिश दी, लेकिन वह नहीं मिला। वहीं विशाल के घर देर रात दबिश दी गई।

एक दर्जन की तलाश

पुलिस को गिरोह से जुड़े एक दर्जन लोगों के बारे में जानकारी मिली है। इसमें एक छात्र एमबीबीएस कर चुका है, एक रिटायर्ड पुलिस अफसर का रिश्तेदार है। इसके अलावा रैकेट से जुड़े भोपाल के कुछ लोगों के नाम भी सामने आए हैं। इन सभी की तलाश में तीन पुलिस पार्टियां रवाना की गई हैं। हालांकि, संदिग्ध छात्र रजनीकांत व रायसिंह से कोई खास जानकारी नहीं मिली है।

पांच छात्र दे सकेंगे परीक्षा: जस्टिस एएम खानविलकर व जस्टिस एसके गंगेले की डिवीजन बेंच ने शुक्रवार को सत्र २००९ बैच के छात्र सचिन यादव मोनिका यादव, निर्मला सोलंकी, कुलदीप तोमर, अरुण कुमार को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी। लेकिन इनका रिजल्ट घोषित करने पर रोक लगा दी है।

व्यापमं ने पीएमटी परीक्षा 2012 में 701 छात्रों के रोल नंबर में गड़बड़ी की आशंका जताई है। एसटीएफ ने जीआरएमसी के कार्तिक, जितेंद्र, परख, दीपशिखा, सरोज, अभिजीत, वासुदेव, अनूप, विवेक और आशुतोष के बारे में जानकारी मांगी है। हालांकि डीन डॉ. जीएस पटेल का कहना है कि वे भोपाल में हैं, इसलिए वे सत्र २०१२ के छात्रों के बारे में एसटीएफ की ओर से भेजे गए ई-मेल को चेक नहीं कर सके हैं।

तीन छात्र रिमांड पर: जेएमएफसी एचके रघुवंशी की कोर्ट ने शुक्रवार को छात्र विशाल यादव, देशराज गुर्जर व संदीप लहारिया को सात दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया। आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई 30 जनवरी को होगी। हालांकि संदीप लहारिया के वकील महेश गोयल व विशाल यादव के वकील वीके शर्मा ने अपने मुवक्किलों को बेकसूर बताया।