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टेस्ट से होगा कैंपस सेलेक्शन

7 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर ग्वालियर
शहर के एजुकेशन इंस्टीट्यूट में कैंपस हायरिंग के नए फंडे अपनाए जा रहे हैं। इसमें स्टूडेंट्स के लिए साइकोमैट्रिक टेस्ट कराना शुरू कर दिया है। इस टेस्ट में मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग और फॉर्मेसी के स्टूडेंट्स शामिल हो सकते हैं। इंस्टीट्यूट में कैंपस हायरिंग फरवरी लास्ट वीक से शुरू हो जाएगी। नई कैंपस हायरिंग प्रोसेस में यह टेस्ट स्टूडेंट्स के लिए मशक्कतभरा तो होगा, लेकिन कंपनियों को उनकी लीडरशिप स्किल और साइकोलॉजी जानने का मौका मिलेगा। यह टेस्ट स्टूडेंट्स से कंपनी के रिप्रजेंटेटिव जनरल डिस्कशन और पर्सनल इंटरव्यू के वक्त लेंगे।
सिचुएशन फेस करेंगे स्टूडेंट्स
विक्रांत कॉलेज के वाइस प्रेसीडेंट संजीव सिंह चौहान ने बताया कि कैंपस रिक्रूटमेंट में कंपनियां स्टूडेंट्स की साइकोलॉजी को जानना चाहती हैं। ऐसे में साइकोमैट्रिक टेस्ट में उनसे सिचुएशन बेस्ड सवाल पूछे जाते हैं। इस टेस्ट में उनकी निर्णय लेने की क्षमता, परिस्थितियों के हिसाब से एडजस्ट करना और विपरीत परिस्थितियों में काम करने की क्षमता को परखा जाता है।




सिचुएशन फेस करेंगे स्टूडेंट्स

विक्रांत कॉलेज के वाइस प्रेसीडेंट संजीव सिंह चौहान ने बताया कि कैंपस रिक्रूटमेंट में कंपनियां स्टूडेंट्स की साइकोलॉजी को जानना चाहती हैं। ऐसे में साइकोमैट्रिक टेस्ट में उनसे सिचुएशन बेस्ड सवाल पूछे जाते हैं। इस टेस्ट में उनकी निर्णय लेने की क्षमता, परिस्थितियों के हिसाब से एडजस्ट करना और विपरीत परिस्थितियों में काम करने की क्षमता को परखा जाता है।



ठ्ठद्ग2 ह्लह्म्द्गठ्ठस्र

आईटीएम यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ .योगेश उपाध्याय ने बताया कि साइकोमेट्रिक टेस्ट कंपनियां अपने फायदे के लिए लेती हैं। ज्यादातर कंपनियां स्टूडेंट्स को हायर करने के बाद उन्हें पर्सनल ट्रेनिंग और ग्रुमिंग करती है। ऐसे में स्टूडेंट्स को यदि किसी दूसरी कंपनी में अच्छे सैलरी पैकेज पर जॉब मिल जाती है। तो स्टूडेंट्स पुरानी कंपनी से रिजाइन देकर नई कंपनी जॉइन कर लेते हैं। इसलिए यह टेस्ट ज्यादातर कंपनियों ने कैंपस हायरिंग में कंपल्सरी कर दिया है।

जॉब स्टेबिलिटी के लिए टेस्ट जरूरी