झूठ बोलकर करा रहे रजिस्ट्री
नगर संवाददाता - ग्वालियर
स्टाम्प ड्यूटी बचाने के लिए कोई मकान को प्लॉट बता रहा है तो कोई दुकानों को मकान। इस तरह के मामले उप पंजीयक की मौका जांच बंद होने के बाद लगातार बढ़ते जा रहे हैं। पिछले आठ माह में अंचल में ऐसे 94 मामले पकड़ में आए हैं। अब इन सभी में संपत्ति खरीदारों से वसूली होगी।
पंजीयन विभाग की आय में लगातार हो रही गिरावट के कारण अफसरों की चिंता बढ़ गई है। ऐसा प्रॉपर्टी बाजार में मंदी व स्टाम्प ड्यूटी की चोरी के बढ़ते चलन के कारण हो रहा है। पंजीयन विभाग ने एक जनवरी 2013 से उप पंजीयकों को संपत्ति की मौका जांच से रोक दिया है। अब केवल खरीदार-विक्रेता के शपथ पत्र के आधार पर ही दस्तावेज पंजीयन होते हैं। इस व्यवस्था के बाद रेंडम जांच के निर्देश हैं और अफसरों का अलग-अलग कोटा भी तय है। रेंडम जांच की जानकारी मई से ऑनलाइन दर्ज होने लगी है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर मई से दिसंबर 2013 तक महानिरीक्षक पंजीयन ने 23 ऐसे मामले पकड़े हैं, जिनमें संपत्ति खरीदार ने मकान को प्लॉट या दुकानों को मकान बताकर दस्तावेज पंजीयन करा लिए। इसी तरह से 71 मामले उप महानिरीक्षक पंजीयन ने भी पकड़े हैं।
: 3 सितंबर 2013 को दस्तावेज क्रमांक 1201 का पंजीयन हुआ। इसमें खरीदार ने मकान की कीमत 24 लाख बताकर दस्तावेज पंजीयन करा लिए। रेंडम जांच में यहां पर भू-तल पर दुकानें निकलीं और संपत्ति का मूल्य 39 लाख 53 हजार 285 रुपए आंका गया।
: 23 सितंबर 2013 को ही एक अन्य दस्तावेज 1118 का पंजीयन हुआ। इसमें भी खरीदार ने मकान बताते हुए कीमत 18 लाख 52 हजार 500 रु. बताई। रेंडम जांच की गई तो यहां पर भू-तल पर गोदाम बना मिला और ऊपरी मंजिल पर आरसीसी का मकान। इसकी कीमत 33 लाख 92 हजार रु. आंकी गई।