दस्तावेज गायब किए, फिर भी कार्रवाई नहीं
नगर संवाददाता - ग्वालियर
पीएमटी फर्जीवाड़े में एक से डेढ़ दर्जन आरोपी छात्रों के दस्तावेज गायब करने वाले अब तक पुलिस कार्रवाई से बचे हैं। इनके खिलाफ कानूनन साक्ष्य मिटाने व आईपीसी धारा 406, 420, व 380 के तहत प्रकरण बनता है।इन्हें गिरफ्तार कर पूछताछ किए जाने से फर्जी डॉक्टर बनाने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हो सकता है। पुलिस अफसरों से जुड़े डेढ़ दर्जन फर्जी मेडिको व सरगना इस रैकेट में शामिल हैं। इन फर्जी मेडिको में ग्वालियर में पदस्थ दो डीएसपी व एक डीजी रैंक के अफसर भी शामिल हैं।
पीएमटी फर्जीवाड़े में एक बड़े रैकेट को बचाने के लिए पुलिस में जिम्मेदार पदों पर पदस्थ अफसरों की शह से रिकॉर्ड गायब करने वाले अफसरों के खिलाफ अब तक कोई प्रकरण दर्ज नहीं किया गया है। दस्तावेज लेने के लिए पुलिस अब तक व्यापमं व चिकित्सा शिक्षा विभाग को एक दर्जन से अधिक पत्र लिख चुकी है। दस्तावेज गायब करने वाले आरोपी पकड़े जाने पर वह नाम खोल सकते हैं जिसने उनसे रिकॉर्ड गायब कराया। रिकॉर्ड गायब कराने वाले आरोपी ने इंस्पेक्टर से लेकर डीजी रैंक के अफसरों तक बेटे-बेटियों व नजदीकियों का सलेक्शन पीएमटी में कराया है और बाद में एमबीबीएस परीक्षा पास कराने में मदद की है। इन दोनों विभागों के दस्तावेज गायब करने वाले अफसरों के खिलाफ अब तक पुलिस ने कोई प्रकरण दर्ज नहीं किया है औैर न ही पूछताछ करने की हिम्मत जुटाई है।
जिम्मेदार को सह आरोपी बनाया जाना चाहिए
सरगना को बचाने मोहरे को बनाया मास्टरमाइंड
॥किसी भी आपराधिक प्रकरण में यदि महत्वपूर्ण दस्तावेज जानबूझकर गायब किए जाते हैं या उनमें कोई कूटरचना की जाती है तो ऐसा करने वाले जिम्मेदार के खिलाफ आईपीसी के तहत प्रकरण दर्ज कर उन्हें सह आरोपी बनाया जाना चाहिए।ञ्जञ्ज
एसएस शुक्ला, रिटा. एडीजी,
॥पीएमटी कांड के हाई प्रोफाइल मामले अलग-अलग कई जांच कराने से निष्पक्षता पर सवालिया निशान लगता है। मंशा सही होती तो इसे सीबीआई को सौंपा जा सकता था। प्रकरण की जांच में दस्तावेज महत्वपूर्ण हैं, उन्हें नष्ट करना गंभीर अपराध है। रिकॉर्ड गायब करने वालों पर साक्ष्य मिटाने व आईपीसी के तहत कार्रवाई की जाए तो काफी नए खुलासे सामने आ सकते हैं।
मुकेश गुप्ता, वरिष्ठ अभिभाषक
पुलिस ने हाल ही में पकड़े विशाल यादव को पीएमटी कांड का मास्टरमाइंड घोषित कर दिया, जबकि मेडिकल कॉलेज से लेकर पुलिस अफसर मास्टरमाइंड का नाम जानते हैं। विशाल उस मास्टरमाइंड के साथ रहा है। बताया गया है कि इस कांड में जगदीश सगर के बाद दूसरे नंबर के सरगना को बचाने के लिए पुलिस मोहरे विशाल को मास्टरमाइंड घोषित कर रही है। बताया यह भी गया है कि विशाल को पकड़े जाने के बाद शनिवार को एक पुलिस अधिकारी के साथ इस रैकेट वालों के नजदीकी की बैठक भी हो चुकी है।
छात्रों के दस्तावेज नहीं मिले हैं
॥फर्जी मेडिकल छात्रों के प्रकरण में एक दर्जन से अधिक छात्रों के दस्तावेज नहीं मिले हैं। इसके लिए कई पत्र लिखे गए लेकिन कोई संतोषजनक जवाब व दस्तावेज नहीं दिए गए।ञ्जञ्ज
जोर सिंह भदौरिया, सीएसपी
डेढ़ दर्जन छात्रों के दस्तावेज गायब, दो साल में एक दर्जन पत्र लिखे