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तुम्हें हो न जाए मोहब्बत तो कहना, हमसे नजरें मिलाकर देखो

7 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर ग्वालियर
‘उसके हंसते चेहरे से तो ऐसा लगता है, शायद उसको मिलना मेरा अच्छा लगता है।मेरी भीगी पलकों पे ये आंसू उसके हैं, याद में मेरी वो रोया हो, ऐसा लगता है। ये हमारी सोच है, जरा उनका अंदाज तो देखिए आईने में वो अपनी अदा देख रहे हैं, मर जाए कि जी जाए कोई उनकी वला से।’
रूठने-मनाने की यह शाम पिछली सभी शामों से अलहदा रही। और..इस शाम में रंग भरने विरासत के मंच पर आए मशहूर गजल गायक मेहंदी हसन के भतीजे डॉ.रोशन भारती। कहते हैं शायर को मोहब्बत विरासत में मिलती है, इसलिए शाम-ए-गजल का आगाज उन्होंने एक खूबसूरत गजल मोहब्बत के दीपक जलाकर तो देखो, जरा दिल की दुनिया सजाकर तो देखो, तुम्हें हो न जाए मोहब्बत तो कहना, जरा हमसे नजरें मिलाकर तो देखो से किया। एक्सपोर्ट फेसिलिटेशन सेंटर में सोमवार को आयोजित शाम-ए-गजल में उन्होंनें हसरत जयपुरी की मोहब्बत भरी गजल कुछ इस अंदाज में सुनाई। देखें-याद से दिल बहलाओ ना,आजाओ आजाओ ना। प्यासी-प्यासी मन की धरती,तुम सावन बन जाओ न...।
उन्होंने अपने पिया को मनाने के लिए शाहिद कबीर की गजल को पेश की। बेसबब बात बढ़ाने की जरूरत क्या है, हम खफा कब थे मनाने की जरूरत क्या है। दिल से मिलने की तमन्ना ही नहीं जब दिल में, हाथ से हाथ मिलाने की जरूरत क्या है...। मौजूदा श्रोताओं की फरमाइश पर उन्होंने मदनमोहन दानिश की गजल ‘रूठा लाख मना लेता है,घर तो फिर घर है बुला लेता है।ये तो दानिश की हुनरमंदी है, बात बिगड़ी भी बना लेता है...। अंत में ‘बुझती सी आस है तुम बिन। सारा मंजर उदास है तुम बिन, जिंदगी बदहवास है तुम बिन। जाने जाना मेरी चले आओ चले आओ...।