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प्रीफार्मुलेशन प्रक्रिया में होती है समीक्षा
सिटी रिपोर्टर ग्वालियर
प्रीफार्मुलेशन प्रक्रिया में औषधि के भौतिक, रासायनिक और यांत्रिक गुणों की समीक्षा की जाती है। इसके जरिए ही औषधि की मात्रा और प्रकार का पता चलता है। यह बात राजीव एकेडमी फॉर फार्मेसी मथुरा के फार्मास्युटिक्स विभाग की डीन डॉ.कमला पाठक ने कही। वे आईटीएम यूनिवर्सिटी में आयोजित नेशनल सेमिनार को संबोधित कर रही थीं।
नेशनल सेमिनार में हिमाचल प्रदेश के लॉरियट इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी से आए प्रो.राजेंद्र अवस्थी निर्माण विधि से गुजरने के बाद ही कोई भी औषधि को मानक घोषित किया जाता है। इस अवसर पर अहमदाबाद से आए साइंटिस्ट धनंजय सिंगारे ने कहा कि बाजार में दवा पहुंचने से पहले उसे तीन क्लीनिकल फेज से गुजरना होता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक ड्रग का अपना अलग कार्य होता है। इस अवसर पर यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो.योगेश उपाध्याय, चांसलर सलाहकार डॉ.आरडी गुप्ता उपस्थित रहे।
डॉ.कमला पाठक ने कही। वे आईटीएम यूनिवर्सिटी में आयोजित नेशनल सेमिनार को संबोधित कर रही थीं।
नेशनल सेमिनार में हिमाचल प्रदेश के लॉरियट इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी से आए प्रो.राजेंद्र अवस्थी निर्माण विधि से गुजरने के बाद ही कोई भी औषधि को मानक घोषित किया जाता है। इस अवसर पर अहमदाबाद से आए साइंटिस्ट धनंजय सिंगारे ने कहा कि बाजार में दवा पहुंचने से पहले उसे तीन क्लीनिकल फेज से गुजरना होता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक ड्रग का अपना अलग कार्य होता है। इस अवसर पर यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो.योगेश उपाध्याय, चांसलर सलाहकार डॉ.आरडी गुप्ता उपस्थित रहे।
ठ्ठड्डह्लद्बशठ्ठड्डद्य ह्यद्गद्वद्बठ्ठड्डह्म्
 आईटीएम यूनिवर्सिटी में आयोजित नेशनल सेमिनार में उपस्थित अतिथि।