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महिला आरक्षकों के पदों पर की पुरुष आरक्षकों की नियुक्ति रद्द

7 वर्ष पहले
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ग्वालियर। वर्ष 2012 में परिवहन विभाग में आरक्षकों के 332 पदों पर हुई भर्ती परीक्षा में से महिला आरक्षक के पदों पर पुरुषों की नियुक्ति को हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने रद्द कर दिया है। महिला आरक्षक के 100 पदों में से लगभग 56 पर पुरुषों की भर्ती की गई थी। साथ ही कोर्ट ने इन पदों पर फिर से नियुक्ति करने के लिए विज्ञापन जारी करने को कहा है। यह फैसला हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने मंगलवार को सुनाया।

साथ ही कोर्ट ने परिवहन विभाग में आरक्षक पद के लिए पुरुष व महिला आरक्षकों के पदों पर एक समान शारीरिक मापदंड रखने के नियम को अवैधानिक बताते हुए खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि महिलाओं के लिए शारीरिक योग्यता के संबंध में पृथक से स्पष्ट नियम बनाएं।

कोर्ट ने शासन को पृथक से नियम बनाने के संबंध में शासन को चार सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद महिला आरक्षकों के पदों पर पुरुष आरक्षकों की भर्ती को निरस्त कर, रिक्त हुई जगह पर महिलाओं की नियुक्ति के लिए शासन को विज्ञापन जारी करने को कहा है। हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के जस्टिस एसके गंगेले व जस्टिस जीडी सक्सेना की डिवीजन बेंच ने पूर्व में याचिका पर सुनवाई कर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

उक्त भर्ती परीक्षा में महिलाओं के लिए लगभग सौ पद थे, इनमें 44 पदों पर महिलाओं की नियुक्ति हुई थी, शेष पदों पर शारीरिक मापदंड पूरे नहीं कर पाने के कारण महिलाओं की जगह पुरुष आरक्षकों की भर्ती कर दी गईं थी। याचिकाकर्ता हिमाद्री राजे ने अपनी याचिका में परिवहन विभाग की भर्ती परीक्षा के नियम को चुनौती देते हुए कहा था कि ट्रांसपोर्ट सेवा भर्ती नियम 2011 के तहत महिला व पुरुष का शारीरिक मापदंड समान रखा गया है।

जबकि इसके पूर्व हुईं भर्ती परीक्षा में ट्रांसपोर्ट सेवा भर्ती नियम 2001 के तहत महिला व पुरुषों के शारीरिक मापदंड अलग-अलग रहते थे। 2012 में परिवहन विभाग में 332 पदों पर आरक्षकों की भर्ती के लिए परीक्षा की सूचना निकाली गई। इसमें महिला व पुरुष के शारीरिक मापदंड समान रखे गए हैं, जो कि गलत हैं। इसमें याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी अधिवक्ता नवनिधि पढेरिया ने की। वहीं शासन की ओर से पैरवी अतिरिक्त महाधिवक्ता एमपीएस रघुवंशी ने की।