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हैंडराइटिंग रिपोर्ट से १० छात्र और आ सकते हैं पुलिस घेरे में

7 वर्ष पहले
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नगर संवाददाता - ग्वालियर
गजराराजा मेडिकल कॉलेज के संदिग्ध छात्रों की ओर पुलिस का घेरा मजबूत होता जा रहा है। पुलिस भोपाल से आने वाली हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। भोपाल से जुड़े सूत्रों के अनुसार जिन छात्रों की हैंड राइटिंग रिपोर्ट आना है, उनमें लगभग दस छात्र ऐसे हैं जिन्होंने फर्जी तरीके से प्रवेश लिया था। ऐसे छात्रों पर पुलिस ने नजर रखना शुरू कर दिया है। वहीं पुलिस ने एक छात्र को बड़वानी से पकड़ा है, इसने उस व्यक्ति का नाम भी बताया है जिसे उसने प्रवेश दिलाने के लिए रुपए दिए थे।
जीआरएमसी के वर्ष 2009 के छात्रों का रिकॉर्ड व्यावसायिक परीक्षा मंडल से मिलने के बाद पुलिस ने दस्तावेज के आधार पर इनकी हैंडराइटिंग की जांच के लिए रिकॉर्ड पुलिस हेडक्वार्टर भेजा था। फिलहाल इसकी फाइनल रिपोर्ट तैयार नहीं हुई है, लेकिन प्राथमिक तौर पर जो जानकारी मिली है उसमें लगभग दस छात्रों की हैंडराइटिंग गड़बड़ मिली है। जिन छात्रों के बारे में ऐसी रिपोर्ट मिली है उन पर पुलिस नजर रख रही है।




सात संदिग्ध छात्रों को अग्रिम जमानत मिली

विशेष न्यायाधीश जगत मोहन चतुर्वेदी की कोर्ट से बुधवार को पीएमटी फर्जीवाड़े के संदिग्ध सात छात्रों को अग्रिम जमानत मिल गई है। संदिग्ध छात्र भिंड निवासी सुरेन्द्र सिंह मौर्य पुत्र रामस्वरूप मौर्य, गांधी रोड निवासी धर्मेंद्र कुमार शाक्य पुत्र मांगीलाल शाक्य, आनंद नगर निवासी ललित कुमार गोलारिया पुत्र बाबूलाल गोलारिया, सुरेश नगर निवासी हेमदत्त सिंह पुत्र दुर्गा सिंह, मुरैना निवासी राजकुमार कोठारी पुत्र एसएस कोठारी, भिंड निवासी मदनसिंह हिंडोलिया पुत्र बुद्ध सिंह हिंडोलिया एवं मुरैना निवासी दीपेश खरे पुत्र शिवदयाल खरे को अग्रिम जमानत मिल गई है।

एक छात्र पकड़ा, दूसरे का नाम सामने आया

पुलिस ने बड़वानी से एक एमबीबीएस छात्र को पकड़ा है। इसे मंगलवार की रात पकड़ा गया था। पूछताछ में इसने बताया कि उसने एक अन्य छात्र को प्रवेश के लिए रुपए दिए थे। उसने ही उसके प्रवेश का इंतजाम कराया था।

दीपक और विशाल के अंक मिले, कॉपियां नहीं

जेयू में पुलिस बुधवार को विशाल यादव और दीपक यादव का अकादमिक रिकॉर्ड और कॉपियां लेने पहुंची। सीएसपी झांसी रोड जोर सिंह भदौरिया, कुलपति संगीता शुक्ला और डिप्टी रजिस्ट्रार आईके मंसूरी से मिले। उन्होंने इनके अकादमिक रिकॉर्ड के साथ-साथ इनकी कॉपियां भी मांगीं। जेयू प्रबंधन ने रिकॉर्ड तो उपलब्ध करा दिया, लेकिन कॉपियां देने में असमर्थता व्यक्त की। इनका कहना था कि नियमानुसार कॉपियां छह महीने में नष्ट कर दी जाती हैं। ज्ञात हो जीआरएमसी में परीक्षाओं के दौरान बड़े पैमाने पर नकल की शिकायतें आती हैं। इसलिए इस रिकॉर्ड से पुलिस शायद ही किसी नतीजे पर पहुंचे।