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19 संदिग्ध छात्रों को सशर्त अग्रिम जमानत

7 वर्ष पहले
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ग्वालियर - पीएमटी फर्जीवाड़े में संदिग्ध 19 चिकित्सा छात्रों को जिला न्यायालय से सशर्त अग्रिम जमानत मिल गई है। जिला सत्र न्यायाधीश जगदीश बाहेती की कोर्ट से गुरुवार को 9 संदिग्ध छात्रों को 6 माह के लिए अग्रिम जमानत मिली। वहीं विशेष न्यायाधीश जेएम चतुर्वेदी की कोर्ट से दस संदिग्ध छात्रों को 3 माह की अग्रिम जमानत मिली। जिला न्यायाधीश की कोर्ट से भिंड निवासी संतोष शर्मा पुत्र भागीरथ शर्मा, झाबुआ निवासी राकेश निमामा पुत्र मांगीलाल निमामा, निवासी ग्वालियर अरुण सिंह यादव पुत्र अतिबल सिंह यादव, मुरार निवासी तपस शर्मा पुत्र पवन कुमार शर्मा, नाका चंद्रवदनी निवासी बृजेन्द्र सिंह रघुवंशी पुत्र देवेन्द्र प्रताप सिंह, सेंवढ़ा निवासी विवेक सिंह निरंजन पुत्र कमलेश सिंह निरंजन, शिंदे की छावनी निवासी देवेन्द्र प्रताप सिंह राजपूत पुत्र भगवान सिंह राजपूत, रविशंकर हॉस्टलर नरेन्द्र सिंह पुत्र लीलाराम, न्यू हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी मुरैना निवासी चंद्रशेखर माहौर पुत्र देवीराम माहौर को 6 माह की सशर्त अग्रिम जमानत दी गई। वहीं विशेष न्यायाधीश की कोर्ट ने संदिग्ध छात्र माखन सिंह, दुष्यंत तिवारी, हेमंत शाक्य, कमलेश कोठारी, नितिन कुमार पुरैया, मेहरबान सिंह, गजेंद्र सिंह सोलंकी, संजीव कुमार शाक्य, रामप्रिय दास शाक्य, मुकेश कुमार को तीन माह के लिए सशर्त अग्रिम जमानत दी। याचिकाकर्ता संदिग्ध छात्रों की ओर से पैरवी अधिवक्ता जितेन्द्र शर्मा, क्षितिज शर्मा व अभिषेक पाराशर ने की।



रसूखदार नहीं कर पाएंगे जांच को प्रभावित: गौर

पीएमटी फर्जीवाड़े की जांच को कोई रसूखदार प्रभावित नहीं कर पाएगा। प्रभावशाली लोगों के परिचितों को लाभ देने की बातें अफवाह हैं, इन बातों पर कतई भरोसा नहीं किया जाए। हमें पुलिस पर पूरा भरोसा है कि इस मामले की जांच वह निष्पक्ष ढंग से करेगी, इसलिए सीबीआई को इसकी जांच नहीं सौंपी जाएगी। यह बात गृहमंत्री बाबूलाल गौर ने एसपी ऑफिस सभागार में गुरुवार को संवाददाताओं से चर्चा में कही।

अरुण जाटव

ग्वालियर - प्री मेडिकल टेस्ट दिए बिना जीआरएमसी में प्रवेश लेने वाले एक और छात्र को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। छात्र मूल रूप से गोहद का रहने वाला है और साढ़े तीन लाख रुपए देकर सिलेक्ट हुआ था। जिस एमबीबीएस छात्र के जरिए डील की थी, उसकी मौत हो चुकी है। वहीं जिसको रुपए दिए थे, उसको पुलिस तलाश रही है।

एसपी संतोष कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस ने वर्ष 2010 के जिन फर्जी छात्रों को गिरफ्तार किया था उन्होंने बताया था कि चक चंदोकर गोहद में रहने वाले अरुण जाटव पुत्र गंधर्व सिंह ने फर्जी तरीके से वर्ष 2010 में एमबीबीएस में प्रवेश लिया था। इस आधार पर पुलिस ने अरुण को गिरफ्तार कर लिया। अरुण ने पूछताछ में बताया कि वर्ष 2007 में वह पड़ाव स्थित कोचिंग पर पीएमटी की तैयारी कर रहा था। यहां पर जीआरएमसी का छात्र ज्ञानसिंह भी आता था। इसने कहा कि साढ़े तीन लाख रुपए दो तो बिना परीक्षा के ही तुम्हारा मेडिकल कॉलेज में प्रवेश करवा दूंगा। ज्ञानसिंह ने अमित यादव से मिलवाया, इसके बाद मैंने फॉर्म भरकर दे दिया। फॉर्म भरते समय मैंने इस पर अंगूठा भी नहीं लगाया था, ऐसा करने के लिए इन दोनों ने मुझसे कहा था। रिजल्ट निकलने के दो दिन बाद ज्ञान सिंह ने बताया कि उसका सिलेक्शन हो गया है। इसके बाद भोपाल में काउंसलिंग हुई। सिलेक्शन होने के बाद अरुण ने तीन बार में साढ़े तीन लाख रुपए दिए।