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एक्टिंग मेरे लिएजज्बा ही नहीं एक जुनून है

8 वर्ष पहले
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क सिटी रिपोर्टर इंदौर
मराठी-हिंदी फिल्मों और रंगमंच में काम करने के बावजूद मेरा आज तक सीखना जारी है। मैं मानती हूं कि एक्ंिटग कोई रूल बुक से नहीं सीखी जा सकती। बचपन में गणेशोत्सव के दौरान होने वाले कार्यक्रमों में पार्टिसिपेट करने के बाद भाई संदीप के पदचिन्हों पर मैंने चलने की कोशिश की। तब वे मेरे रोल मॉडल थेेेे, पढ़ाई से लेकर एक्टिंग तक के लिए मैंने उनसे ही पहले-पहल टिप्स लीं। मेरे लिए एक्टिंग जज्बा ही नहीं एक जुनून है। मैंने एक्टिंग सीखने के लिए एक्टर्स की कास्ट्यूम्स भी संभाली और स्टेज की सफाई तक की है। यह कहना है ख्यात एक्ट्रेस सोनाली कुलकर्णी का। वे सानंद न्यास के तहत 11 और 12 जनवरी को मराठी नाटक व्हाइट लिली आणि नाइट राइडर का मंचन करने इंदौर आ रही हैं।
गांव से आई लड़की और ऑस्कर नामिनेशन
सोनाली कुलकर्णी कहती हैं कि मुझे फख्र है कि महाराष्ट्र के छोटे से गांव से निकली लड़की का एक्टिंग सफर ऑस्कर की ऑफिशियल इंट्री के रूप में पहुंची। फिल्म द गुड रोड ऑस्कर के लिए पहुंची थी। इस गुजराती फिल्म को सभी ने पसंद किया है और इसमें मेरी एक्टिंग को भी सराहा गया। मुझे सबसे ज्यादा जो मिला है वह है खुशी। शादी के बाद मेरे पति ने जब कॉम्प्लीमेंट दिया कि तुम खूबसूरत हो तो मुझे बेहद अच्छा लगा क्योंकि एडोलोसेंट एज में मुझे लगता था कि मैं बहुत ही सिंपल हूं।
बड़े निर्देशकों के साथ काम
सोनाली बताती हैं कि फिल्मों में काम करने के साथ ऐसा सौभाग्य मिला कि ख्यात निर्देशक और नाटककार गिरीश कर्नाड की फिल्म चेलुवी में काम करने का मौका मिला। ग्रेजुएशन पूरा करते-करते मैं सात फिल्मों में एक्टिंग कर चुकी थी। अमोल पालेकर की फिल्म दायरा में काम करने का मौका मिला।
स्टेज की सफाई भी की और कास्ट्यूम भी संभाले
फग्र्यूसन क ॉलेज में वन एक्ट प्लेज में हिस्सा लिया करती थी। तब सीनियर्स मुझसे स्टेज की सफाई और कॉस्ट्यूम्स संभालने का काम करवाते थे। लेकिन एक्टिंग का जूनुन ऐसा था कि मैंने यह सब काम किए।
अच्छे डायरेक्टर्स से सीखे गुर
मैंने ख्यात निर्देशकों हबीब तनवीर, पंडित सत्यदेव दुबे, जब्बार पटेल, अमोल पालेकर, सुमिता भावे जैसे डायरेक्टर्स से मैंने एक्टिंग के कई गुर सीखे। ये सभी बहुत भले और मेरा ख्याल रखने वाले लोग थे। पंडित सत्यदेव दुबे ने मुझे एक्टिंग में ब्रीदिंग और पॉका लेना सिखाया। उन्होंने क्रियापद के बारे में विस्तार से बताया। चलने और बोलने की बातें सिखाई। एक बार वे वर्कशॉप लेने के लिए पुणे आए थे। मेरा लक्ष्य बस अच्छी एक्टिंग करना था। मुझे एक इंग्लिश फिल्म में काम करना था। मैंने पंडितजी से अंग्रेजी सिखाने की रिक्वेस्ट की। उन्होंने एक्टर्स नेवर डाय बट.. एक प्रोडक्शन किया और मेरी अंग्रेजी ठीक करने में मदद की। जब्बार पटेल से मैंने विषय की गहराई में जाना सीखा। अमोल पालेकरजी से मैंने वक्त की पाबंदी सीखी। हबीब तनवीर से लाइट्स के बारे में सीखा।
जो भी किया, पूरे मन से किया
मैंने थिएटर के साथ फिल्में, टीवी सीरियल्स, मराठी और हिंदी फिल्मों के साथ साउथ की फिल्में भी की हैं। संजय दत्त, ऋतिक रोशन, आमिर खान जैसे कलाकारों से भी बहुत कुछ सीखा।
अब पैशन है राइटिंग
अब मेरा पैशन है राइटिंग। मराठी के एक अखबार के लिए मैंने कॉलम्स लिखे हैं। गेस्ट एडिटर के रूप में लिखे कॉलम्स की एक किताब सो कूल आ चुकी है और दूसरी की तैयारियों में लगी हूं।