अक्षर ही ब्रह्म हैं मेरे लिए
सिटी रिपोर्टर इंदौर
मेरे लिए अक्षर ही ब्रह्म हैं। मैंने पूर्व प्रधान मंत्री चंद्रशेखर के समय में प्राइवेट इंडस्ट्री के लिए मोडम के उपयोग की अनुमति की मांग की थी। तब संभव हो पाया था कि एक से ज्यादा जगहों पर अखबार एकसाथ प्रकाशित किया जा सके।
1980 के दशक में नेहरू सेंटर से प्रकाशित होने वाली साइंस एज मैगजीन के रिनोवेशन में जुटा। मैं जैन परिवार से हूं और बिहार से मुंबई काम करने के लिए ही आया था। मैं शुक्रगुजार हूं अपने माता-पिता सोहनी देवी और भंवरलाल का जिनकी वजह से इस फील्ड में सर्वाइव कर सका।
दैनिक भास्कर के इनोवेशन के लिए भोपाल भी आया था 2003 में। मैंने कॉलम डिवीजन, कंडेंसेशन, कंट्रोल टू लॉकिंग रूल्स अप्लाय कि ए जिनके कारण अखबार पढऩे के तौर-तरीके में व्यापक बदलाव आए। नए फॉर्मेट में हमने पहले 4 वड्र्स की हैडलाइन्स, फिर फोंट्स एरियल, हैलेविटिका और अन्य फोंट्स को लेकर काम किए। फिलहाल मैं न्यूमैरिक्स को लेकर काम कर रहा हूं।
मेरे चित्र रज़ा से रिसेंबल करते
लोगों को लगता है कि मेरे चित्र ख्यात चित्रकार सैयद हैदर रज़ा से रिसेंबल करते हैं, यह संयोग मात्र है। हर कलाकार की सेपरेट एंटिटी होती है। मकबूल फिदा हुसेन, सैयद हैदर रकाा की खुदकी एंटिटी है ऐसे ही हर कलाकार की ((काम को समर्पित)) होती है। मैं फोंट्स के जरिये व्यक्तित्व उजागर करता हूं। मेरे पेंटिंग्स आर्कावाइल पेपर पर भी हैं जिनकी उम्र ही 100 साल है। जैन मतानुसार एक चींटी को मनुष्य बनने में 84 लाख योनियों से गुजरना होता है मेरे एक काम बर्थ ऑफ लाइफ में मैंने 84 जुड़े हुए ट्रायएंगल्स के माध्यम से काम किया। जिओ और जीने दो के सिद्धांत में मैं विश्वास भी करता हूं।
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आर्ट एडिटर कमल जैन फरवरी में आर्ट से जुड़े स्टूडेंट्स के लिए एक वर्कशॉप लेने इंदौर आ रहे हैं। सिटी भास्कर से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि-