हम ट्रकों से भेज रहे है माल..
 इंदौर एयरपोर्ट से आपकी जीएसीसी कंपनी एयर कार्गो सर्विस चलाती है?
 हां।
कंपनी यहां से कार्गो सर्विस बंद करने की तैयारी कर रही है?
 हां।
 एयर कार्गो सर्विस बंद करने का क्या कारण है?
 एयर कार्गो सर्विस को जारी करने के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया से सहयोग नहीं मिल रहा है।
 किस तरह का सहयोग नहीं मिल रहा है?
 हमें एयर कार्गो प्लेन नहीं मिला, इसके अलावा हमारा कांट्रैक्ट रिनीवल करने में टाइम लगा रहे हैं।
 कार्गो प्लेन न होने से आपकी कंपनी ट्रकों से माल भेज रही है?
 हां, हम ट्रकों से भेज रहे हैं।
 रिनीवल में क्या समस्या आ रही है ?
 हमारा अनुबंध पांच साल प्लस पांच साल ऐसे दस साल का था, लेकिन इसे रिनीव नहीं कर रहे हैं।
 आपकी कंपनी को कितने रुपए का नुकसान हो रहा है?
 चार से पांच करोड़ रूपए का।
नौ साल से है एयरपोर्ट को कार्गो प्लेन का इंतजार
एयरपोर्ट पर कार्गो का काम कर रही गुजरात की जीएसीसी कंपनी ने एग्रीमेंट बढ़वाने के लिए आवेदन दिया था, जो मेरे कार्यालय से मुंबई मुख्यालय को भेज दिया गया है। एक्सटेंशन के संबंध में निर्णय उन्हें ही करना है। कंपनी यहां से काम बंद कर रही है, यह मेरी जानकारी में नहीं है।
आर.एन. शिंदे, एयरपोर्ट डायरेक्टर
 यह मेरी जानकारी में नहीं
सीधी बात
राकेश शाह, चेयरमैन जीएसीसी
2007 में जब इंदौर एयरपोर्ट से एयर कार्गो सेवा शुरू हुई थी, उस समय एयरपोर्ट अथॉरिटी ने एक साल में कार्गो विमान उपलध करवाने का वादा किया, लेकिन नौ साल बाद भी कार्गो विमान नहीं आया। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया भी एयर इंडिया के प्लेन से कार्गो शुरू करवाती, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
पोर्ट कोड भी मिल चुका है इंदौर एयरपोर्ट को
एयरपोर्ट से सीधे विदेश सामान भेजने के लिए एयरपोर्ट को पोर्ट कोड लेना होता है। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय से इंदौर एयरपोर्ट को पोर्ट कोड 2006 में ही मिल चुका है। पोर्ट कोड मिलने के बाद इंदौर गुड्स लोड होगा और सीधे वहीं पर इसे खोला जाएगा जहां पर इसे भेजा गया है। पोर्ट कोड न होने से इंदौर से भेजा गया गुड्स मुंबई एयरपोर्ट पर जाते ही फिर से चेक होगा और फिर क्लीयरेंस मिलता है। जबकि यहां से सीधे विदेश और विदेश से सीधे सामान इंदौर आ सकता है।
मुंबई तक सड़क मार्ग से
जीएसीसी कंपनी एयरकंडीशनर ट्रकों से भी कार्गो भेज रही है। इन ट्रकों में मुख्य रूप से इंदौर और आसपास की कंपनियों की दवाएं होती हैं। इसके अलावा सामान्य ट्रकों से भी गुड्स भेजा जाता है। इंदौर से करीब 250 टन कार्गो जाता है। ये ट्रक मुंबई जाते हैं, वहां से विमानों द्वारा सामान विदेशों में भेजा जाता है।
कार्गो विमान नहीं होने से ट्रकों से मुंबई भेजा रहा है सामान, एयरपोर्ट अथॉरिटी पर लगाया सहयोग नहीं करने का आरोप
 इंदौर
एयरपोर्ट पर जीएसीसी कंपनी को पांच साल का कांट्रैक्ट मिला था। इसके बाद इसे अगले पांच साल के लिए फिर से आगे बढ़ाना था। यह साल खत्म होने के बाद कंपनी ने कांट्रैक्ट
आगे बढ़ाने के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी से कहा तो कांट्रैक्ट रिनीव नहीं किया।
रिनीव करने के नाम पर तीन माह का एक्सटेंशन दिया गया।
आमदनी से ज्यादा खर्च
एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा कार्गो प्लेन उपलध नहीं करवाने से कार्गो कंपनी लगातार घाटे में जा रही है। कंपनी को एयरपोर्ट पर ऑफिस का किराया तीन लाख रुपए लग रहा है। कस्टम के अफसरों की नियुक्ति और अन्य खर्च ४.५० लाख रुपए है। इस तरह करीब आठ लाख रुपए खर्च हो रहे हैं और कार्गो भेजने से इनक म सिर्फ पांच लाख रुपए प्रतिमाह हो रही है।
एक्सटेंशन को लेकर भी चल रहा है विवाद
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