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ह्यूमन वेलफेयर में हो रहा बायो टेक्नोलॉजी का बेहतर इस्तेमाल

8 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर इंदौर
बायोटेक्नोलॉजी में ट्रांसजेनिक और रिकॉम्बीनेंट डीएनए टेक्नोलॉजी की मदद से बहुत सारी रिसर्च की जा रही हैं। इन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल मेडिकल और एग्रीकल्चर फील्ड में किया जा रहा है। ह्ूयमन वेलफेयर में इसका बेहतर इस्तेमाल किया जा रहा है। यह बताया विक्रम यूनिवर्सिटी, उज्जैन के एक्स वाइसचांसलर प्रो. आर.सी. वर्मा ने। वे बतौर की स्पीकर गुरुवार को देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी की ओर से शुरू हुई नेशनल कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे। सब्जेक्ट ‘रोल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी इन ह्यूमन वेलफेयर’ है। प्रो. वर्मा ने बताया कि बायोटेक्नोलॉजी का इस्तेमाल फॉरेंसिक साइंस में फिंगरप्रिंट्स के लिए किया जाता है।
पानी से ऑइल को अलग करने में मदद
प्रो. वर्मा ने बताया कि बायोटेक्नोलॉजी का इस्तेमाल पॉल्यूशन को कम करने के लिए भी किया जा सकता है। अगर समुद्र में ऑइल मिक्स हो जाता है तो उसे रिकॉम्बीनेंट डीएनए टेक्नोलॉजी की मदद से ऑइलबग बैक्टीरिया का इस्तेमाल करके अलग किया जाता है।
माइक्रोऑर्गेनिज्म से बायोडीजल -
आईआईटी इंदौर की डीएसटी इंस्पायर फैकल्टी डॉ. किरण बाला ने माइक्रोऑर्गेनिज्म से बायोडीजल बनाने के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बायोडीजल को एलगी से बनाया जा सकता है।






डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. हेमेंद्र परमार ने बताया कि रिसर्च करके पता लगाया है कि नारंगी के छिलके में नारिनजिन कंपाउंड होता है। इसका इस्तेमाल डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए किया जा सकता है। रिसर्च के अंनुसार बॉडी में डाई पेप्टिीडिल पेप्टीडेज 4 एंजाइम होता है जिसकी प्रोसेस को रोकने से डायबिटीज कंट्रोल होती है। इस प्रोसेस को रोकने के लिए नारिनजिन का इस्तेमाल किया जा सकता है।

डायबिटीज के लिए

भी कारगर

कॉन्फ्रेंस में आज

24 जनवरी को एनएएफईडी बायोफर्टिलाइजर्स के असिस्टेंट जनरल मैनेजर डॉ. आलोक द्विवेदी और डीबीटी की एनर्जी बायोसाइंस ओवरसीज फेलो डॉ. सुप्रिया रत्नपारखी लेक्चर देंगे। प्रो. डॉ. अनिल कुमार ‘माइक्रोबियल असिस्टेड बायोरिमीडिएशन टेक्नोलॉजी फॉर मैनेजमेंट ऑफ ऑइल स्लज’ सब्जेक्ट पर लेक्चर देंगे।

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