मैंने अभी तक फाइल नहीं देखी
 इंदौर प्रशासन ने वक्फ बोर्ड की लीज निरस्ती संबंधी फाइल आपके पास लगभग आठ माह पूर्व भेजी गई थी। इस पर आपकी ओर से क्या कार्रवाई की गई या की जा रही है?
 यह फाइल फिलहाल मेरी नजर में नहीं आई।
 क्या आपके पास फाइल नहीं आई?
 मेरे पास हर दिन प्रदेश से जुड़ी सैकड़ों फाइलें आती हैं, जिनके बारे में मौखिक तौर पर याद रखना संभव नहीं है। देखने के बाद भी कुछ कहना संभव होगा।
 मैं इस जानकारी के लिए आप आपसे बात करूं?
 मैं अभी समय नहीं बता सकता। हर फाइल को प्राथमिकता के अनुसार ही मेरे पास लाया जाता है। जब यह फाइल आएगी तब ही मैं बात कर पाऊंगा।
50 करोड़ की वक्फ...पेज 1 से जारी
21 मई 2013 के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित की थी यह खबर।
कार्रवाई से बचने के लिए दबाव का खेल शुरू
डीबी स्टार को मिली जानकारी के अनुसार धर्मस्व विभाग में उक्त रिपोर्ट को दबा दिया गया। इसके लिए कई रसूखदारों का भी इस्तेमाल हुआ। चूंकि लीज का मामला भाजपा नेता नागेंद्रसिंह के भाई और शराब कारोबारी वीरेंद्रसिह से जुड़ा है। नागेंद्रंिसंह भाजपा की राजनीति में स्थानीय भाजपा विधायक रमेश मेंदोला का करीबी माना जाता है। इसी कारण इस मामले में धर्मस्व विभाग कार्रवाई नहीं कर रहा है।
 अभी मैं दौरे पर हूं बाद में बात करूंगी
आप जिस वक्फ जमीन के बारे में बात कर रहे हैं उसके बारे में मैं अभी कुछ नहीं कह सकती क्योंकि मैं भोपाल से बाहर दौरे पर हूं। मैं राजधानी पहुंचकर इस मामले की विस्तृत जानकारी देखकर ही बात कर पाऊंगी।यशोधरा राजे सिंधिया, मंत्री, धर्मस्व विभाग, मध्यप्रदेश सरकार
सीधी बात
आरके चतुर्वेदी, धर्मस्व विभाग के प्रमुख सचिव
 जांच कर दी थी
वक्फ बोर्ड के जमीन संबंधी मामले में मुझे कलेक्टर ने जांच के लिए कहा था। जांच में अनियमिताओं पर मैंने रिपोर्ट बनाकर कलेक्टर को सौंप दी थी। इसके बाद क्या हुआ मुझे जानकारी नहीं है। इसमें क्या हुआ आप धर्मस्व विभाग से संबंधित एसडीएम से पूछ सकते हैं।
डीके नागेंद्र, एसडीएम व जांचकर्ता अधिकारी
 कोई पत्र नहीं आया
मेरी जानकारी में वक्फ बार्ड की जमीन संबंधी रिपोर्ट धर्मस्व विभाग भोपाल में प्रमुख सचिव के पास भेज दी गई थी। वहां से अभी तक अगली कार्रवाई के लिए किसी भी तरह का दिशा-निर्देश नहीं आए हैं। इस मामले में कार्रवाई भोपाल से ही होनी है।
रजनीश कसेरा, एसडीएम
 मैं छुट्टी पर हूं
धर्मस्व विभाग की जिम्मेदारी आने के कुछ दिनों बाद से ही मैं दो महीने की छुट्टी पर हूं। इसलिए मुझे नहीं पता कि वक्फ बोर्ड की जमीन की लीज के मामले में क्या हुआ? इसका प्रभार वर्तमान में एसडीएम रजनीश कसेरा के पास है।
सपना जैन, एसडीएम
डीबी स्टार :इंदौर
वक्फ बोर्ड की ५० करोड़ की कीमती जमीन को कौडियों के दाम पर लीज पर देने की जांच रिपोर्ट धर्मस्व विभाग के प्रमुख सचिव आरके चतुर्वेदी के यहां अटक गई है। इंदौर के भाजपा नेता के दबाव में यह फाइल आठ माह बाद भी खुल नहीं पाई है। प्रमुख सचिव का आठ माह बाद भी फाइल को नहीं देखना मंशा और कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है। प्रशासन, वक्फ बोर्ड और धर्मस्व विभाग ने कार्रवाई तो दूर तो लीजधारक को नोटिस तक जारी नहीं किया है।
उल्लेखनीय है कि वक्फ बोर्ड के कुछ अफसरों ने सांठगांठ कर बॉम्बे हॉस्पिटल के पास स्थित बेशकीमती जमीन को कौडिय़ों के दाम पर भाजपा नेताओं से जुड़े रसूखदारों और एक शैक्षणिक संस्था को लीज पर दे दी। महालक्ष्मी नगर से सटी३७ करोड़ की जमीन जश गार्डन और करीब २० करोड़ की जमीन लाइफकेअर एजुकेशन सोसायटी को लीज पर दे दी गई थी। स्कूल की जमीन तो फिलहाल पार्किंग के रूप में इस्तेमाल की जा रही है। जश गार्डन ने बड़ा रेस्टोरेंट खोलने के साथ इसका उपयोग शादी-समारोह में किराए पर देना शुरू कर दिया, जिसकी एक दिन की आमदनी ही लाखों रुपए है। जबकि बोर्ड ने इसे १.५४ लाख सालाना किराए पर दिया है। उल्लेखनीय है कि उक्त जमीन भाजपा विधायक रमेश मेंदोला गुट से जुड़े भाजपा नेता नागेंद्र सिंह के भाई और शराब कारोबारी वीरेंद्रसिंह को महज 14 हजार महीने के किराए से दी गई थी। खास बात यह कि दोनों जगह बोर्ड ने जमीन देने के लिए न तो टेंडर किया और न ही नियमानुसार लीज शर्तें रखी गईं। जबकि नियमों के विपरीत जाकर लीज की ऐसी शर्तें रख दी जिनमें हमेशा लीजधारकों का ही फायदा हो। इन शर्तों को माना जाए तो लीज वापस लेना बोर्ड ने लगभग सभी रास्ते ही बंद कर दिए। इस मामलों का खुलासा डीबी स्टार में होने के बाद प्रशासन ने इसकी जांच बैठा दी। जांच अधिकारी एसडीएम डीके नागेंद्र ने २१ मई २०१३ को जांच पूरी कर कलेक्टर को सौंप दी थी।
जांच में एसडीएम ने भी पाया कि करोड़ों की वक्फ बोर्ड की जमीन को कौडिय़ों के दाम पर लीज पर दे दिया गया। लीज देने के लिए भी सभी नियमों को दरकिनार किया गया। इससे शासन को राजस्व की भी हानि हुई। यदि इसे नियमानुसार खुले टेंडर से दिया जाता तो यह स्थिति नहीं बनती। रिपोर्ट में उक्त जमीन की गलत तरीके से दी गई लीज को निरस्त कर नए सिरे से इसके टेंडर करवाने की अनुशंसा भी की गई।
विभाग को सौंपी रिपोर्ट
अपनी अनुशंसा के बाद कलेक्टर ने यह जांच रिपोर्ट कार्रवाई के लिए धर्मस्व विभाग के प्रमुख सचिव आरके चतुर्वेदी के पास भोपाल भेज दी। बस इसके बाद रिपोर्ट करीब आठ माह से यहीं अटकी हुई है। विभाग को उक्त रिपोर्ट पर कार्रवाई करना तो दूर अभी तक किसी भी लीजधारक को नोटिस तक जारी नहीं किए हैं।
गड़बडिय़ां &नियमों की अनदेखी कर करोड़ों की जमीन कौडिय़ों की लीज पर दी-जांच रिपोर्ट
रसूखदारों से जुड़े मामले में नोटिस तक नहीं दिया गया