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सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड टीआई व सब इंस्पेक्टर बेटी सहित तीन की उम्रकैद रखी बरकरार
भास्कर संवाददाता. इंदौर
18 साल पहले हुई एड-मेरिट हायर सेकंडरी स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्रकुमार वर्मा की हत्या के आरोप मेें उम्रकैद की सजा काट रहे 75 वर्षीय रिटायर्ड टीआई तंवरसिंह बैस, क्राइम ब्रांच में पदस्थ रही सब इंस्पेक्टर बेटी गायत्री बैस व इंदरसिंह को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली। सर्वोच्च न्यायालय ने भी माना कि हत्या का षड्यंत्र रचकर दोनों पुलिस अधिकारी घटना के पहले इंदौर छोड़ चुके थे। मामले में छह आरोपी उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
मीरापथ पर तंवरसिंह की बिल्डिंग में एड मेरिट स्कूल किराए पर संचालित था। स्कूल खाली कराने के विवाद में 8 जून 1996 को वर्मा की हत्या कर दी गई थी। हत्या के आरोप में तंवरसिंह ((तब उम्र करीब 59 वर्ष, अब 77 वर्ष)), सब इंस्पेक्टर पुत्री गायत्री ((तब 37, अब 55 वर्ष)), इंदरसिंह उर्फ रामजी, जगदीश उर्फ गजाधर, रामकिशन पिता भोलाराम एवं सुभाष पिता गेंदालाल सहित छह आरोपियों को जनवरी, 2002 में जिला अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
हाई कोर्ट से पहले मिली जमानत, फिर जेल
सजा के फैसले के खिलाफ तंवरसिंह, गायत्री व इंदरसिंह ने हाई कोर्ट इंदौर में अपील की थी। जून, 2002 में तीनों जमानत पर रिहा हो गए थे। हाई कोर्ट ने मई, २०13 में सजा बरकरार रखते हुए तीनों को जेल में हाजिर होने के आदेश दिए थे। तीनों ने 25 जून को सरेंडर किया था, तब से जेल में हैं। बाकी आरोपी जगदीश, सुभाष व रामकिशन 2002 से ही जेल में हैं और उनकी सजा पूरी होने वाली है।
कोर्ट ने कहा- फैसला बदलना उचित नहीं
हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में इन तर्कों के साथ चुनौती दी गई थी कि घटना के दिन क्राइम ब्रांच की सब इंस्पेक्टर के नाते एक मामले की जांच के लिए गायत्री महू गई थी और तंवरसिंह रायसेन स्थित ससुराल में अस्पताल में भर्ती था। प्रिंसिपल वर्मा की पत्नी सुलोचना व बेटे संजय की ओर से अधिवक्ताओं ने साबित कर दिया कि षड्यंत्र करके चालाकी से ये लोग बाहर चले गए थे।
एड मेरिट स्कूल के प्रिंसिपल की हत्या का मामला
गायत्री बैस
तंवरसिंह बैस
राजेंद्रकुमार वर्मा