स्वदेशी मिल मामला
इंदौर. स्वदेशी मिल की जमीन के डायवर्शन पर उठे विवाद में एसडीओ डॉ. वरदमूर्ति मिश्र ने कलेक्टर के नोटिस का जवाब शनिवार को दे दिया। इसमें उन्होंने कहा है कि सोफिया रियल एस्टेट कंपनी ने ही जून 2013 में भू-राजस्व संहिता की धारा 172 के तहत डायवर्शन मांगने के अपने आवेदन को वापस लेकर धारा 59 में आवेदन दिया था। इसी आवेदन पर फैसला किया गया। इसके बदले में कंपनी ने 27 लाख रु. जमा कराए।
कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने नोटिस में सुरेश सेठ द्वारा आपत्ति लिए जाने का भी हवाला दिया था। एसडीओ ने जवाब में बताया कि सेठ ने 25 मार्च 2013 को आपत्ति लगाते हुए कहा था कि मामले में नगर निगम ने कोर्ट में केस लगा रखा है, लेकिन तब आपत्ति का औचित्य नहीं था। निगम ने जमीन के स्वामित्व को लेकर सितंबर २०11 में प्रकरण लगाया था।
शासन ने भू-उपयोग आवासीय कर दिया था
कलेक्टर ने नोटिस में यह भी पूछा था कि मीसल बंदोबस्त के तहत जमीन वर्ष 1925-26 से 2007-08 तक निगम के नाम थी, तब कंपनी के पक्ष में फैसला कैसे लिया गया? एसडीओ ने जवाब दिया कि कैबिनेट ने ही जुलाई 2007 में नेशनल टेक्सटाइल कॉर्पोरेशन को जमीन बेचने की मंजूरी दी थी। शासन ने अप्रैल 2010 में गजट नोटिफिकेशन करते हुए स्वदेशी मिल की 15.32 एकड़ जमीन का भूमि उपयोग उद्योग से बदलकर आवासीय किया था।
निगम की आपत्ति नहीं- मिल की फाइल में सामने आया कि निगम ने कभी आपत्ति नहीं लगाई। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने जब मार्च २०13 में कंपनी के पक्ष में अनापत्ति जारी की, तब भी निगम ने आपत्ति नहीं लगाई। स्वामित्व को लेकर केस की जानकारी भी एसडीओ कोर्ट को नहीं दी गई। कलेक्टर ने कहा एसडीओ ने नोटिस का जवाब भेज दिया है। जवाब का परीक्षण करना शेष है।
एसडीओ ने कहा-कंपनी ने ही बदल दी थी आवेदन की धारा