- Hindi News
- मप्र में रियल एस्टेट और अन्य निर्माण के क्षेत्र में भोपाल संभाग इंदौर से आगे है, भोपाल से 1 अरब, 87 कर
मप्र में रियल एस्टेट और अन्य निर्माण के क्षेत्र में भोपाल संभाग इंदौर से आगे है, भोपाल से 1 अरब, 87 करोड़ 15 लाख रुपए राजस्व प्राप्त हुआ है।
डीबी स्टार :इंदौर/भोपाल
भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के आंकड़ों के अनुसार मप्र में तेजी से हो रहे सरकारी, निजी और अन्य सार्वजनिक निर्माण कार्यों में सबसे अधिक काम भोपाल संभाग में हुआ है। २००९-१० से जून २०१३ तक मप्र में ६ अरब, ६९ करोड़ ४१ लाख रुपए निर्माण के बदले उपकर मिल चुका है, जो देश में चौथे नंबर पर है। मप्र में भोपाल, इंदौर और जबलपुर संभागों जितना अधिक उपकर जमा हुआ, उस संभाग में उतना अधिक निर्माण हुआ है। इस लिहाज से भोपाल, इंदौर और जबलपुर संभागों में अब तक सबसे अधिक निर्माण कार्य हुआ है।
भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा तमाम निर्माण कार्यों पर कुल निर्माण लागत का १ प्रतिशत उपकर लिया जाता है। निजी आवास या १० लाख से कम को छोड़कर सभी निर्माण प्रोजेक्ट्स पर यह उपकर अनिर्वाय रूप से लगाया जाता है। अब तक मप्र में ६ अरब ६९ करोड़ रुपए उपकर के रूप में जमा हो चुका है। प्रदेशभर से जितना भी उपकर मिला है, उसका करीब २५ प्रतिशत अकेले भोपाल संभाग से है। इसमें व्यावसायिक निर्माण से लेकर बिल्डरों द्वारा किए गए निर्माण और सरकारी निर्माण भी शामिल हैं। यही नहीं अकेले भोपाल में ही करीब २०० ऐसे विवादित प्रकरण हैं, जिनमें उपकर वसूली के आदेश जारी किए गए हैं। यदि इनके द्वारा भी वास्तविक निर्माण लागत का १ प्रतिशत उपकर जमा किया गया होता तो भोपाल संभाग में उपकर की राशि और बढ़ जाती। इनमें सबसे अधिक बिल्डर हैं, जिन्होंने एक पैसा भी उपकर के रूप में जमा नहीं किया या जिन्होंने जमा किया है, उन्होंने प्रोजेक्ट की एस्टीमेटेड कास्ट के आधार पर पैसा जमा कर दिया। जबकि उन्हें कुल वास्तविक निर्माण लागत का १ प्रतिशत पैसा जमा करना था। भोपाल में कुछ बिल्डरों ने एस्टीमेटेड कास्ट के आधार पर उपकर जमा किया था, जब उन्हें लाखों रुपए जमा करने के नोटिस थमाए गए तो वे कोर्ट पहुंच गए। भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल का मानना है कि जिन बिल्डरों ने उपकर नहीं चुकाया है, उन्हें तय मानदंडों के अनुसार जमा करना ही होगा क्योंकि यह कानूनन बाध्य है। ऐसा नहीं करने वाले भले ही कोर्ट में जाकर प्रकरण को न्यायालयीन बना लें, लेकिन जब भी फैसला आएगा, तो वह मंडल के पक्ष में ही आएगा। कई बिल्डरों ने तो नोटिस के बाद उपकर की राशि जमा भी कर दी है।
 मजदूरों का हित होगा
मप्र में जिस तरह उपकर बढ़ा है, उससे साफं कि यहां तेजी से निर्माण हुआ है। देश में उपकर लेने में मप्र चौथे नंबर पर है। जितना उपकर एकत्र होगा, उतना ही मजदूरों का हित है।
अजय नेमा, सचिव, मप्र भवन एवं अन्य निर्माण कल्याण
निर्माण कार्य में भोपाल से पिछड़ा इंदौर संभाग
संभागवार ऐसे बढ़ा
उपकर का ग्राफ
संभाग उपकर की राशि ((रुपए में))
भोपाल १ अरब ८७ करोड़ १५ लाख
९३ हजार
इंदौर १ अरब ७३ करोड़ ८० लाख
८७ हजार
जबलपुर ७३ करोड़ १० लाख ६८ हजार
सागर ६४ करोड़ ३६ लाख २४ हजार
रीवा ६३ करोड़ २० लाख ७६ हजार
होशंगाबाद ४२ करोड़ ३८ लाख ७ हजार
उज्जैन ४२ करोड़ २१ लाख ३६ हजार
ग्वालियर ४० करोड़ ७० लाख ४६ हजार
चंबल १० करोड़ ६० लाख ९६ हजार
कुल ६ अरब ६९ करोड़ ४१ लाख
४९ हजार करोड़ रुपए