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एसएमई को टेक्नोलॉजी मुहैया कराने वाली स्कीम अधर में
बिजनेस भास्कर - इंदौर
छोटे और मझोले उपक्रमों ((एसएमई)) के लिए देश-विदेश से टेक्नोलॉजी खरीद कर मुहैया कराने के लिए प्रस्तावित स्कीम ‘पीएसीई’ अधर में लटक गई है। केंद्र सरकार ने स्कीम के तहत एसएमई के लिए जरूरी टेक्नोलॉजी की पहचान करने की जिम्मेदारी एसएमई उद्योग संगठन को देने का फैसला किया था लेकिन सरकार की शर्तों पर सहमति न बन पाने के कारण एसएमई उद्योग संगठन ने खुद को इस पहल से अलग कर लिया है।
एसएमई के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाले उद्योग संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज ((फिस्मे)) के सेक्रेटरी जनरल अनिल भारद्वाज ने बताया कि डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च ((डीएसआईआर)) ने एसएमई के हर सेगमेंट के लिए जरूरी टेक्नोलॉजी की पहचान करने की जिम्मेदारी हमें सौंपी थी। लेकिन विभाग की कुछ शर्तें व्यावहारिक न होने के कारण संगठन ने खुद को इस पहल से अलग कर लिया है। अब टेक्नोलॉजी की पहचान का काम डीएसआईआर खुद करेगा। इससे पहले विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत काम करने वाले डीएसआईआर ने पेटेंट एक्विजिशन एंड कोलैबोरेटिव रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट ((पीएसीई)) लांच की थी। इस स्कीम में एसएमई के लिए जरूरी टेक्नोलॉजी देश या विदेश से खरीद कर मुहैया कराने का प्रावधान है। इस तरह टेक्नोलॉजी पर आने वाली लागत एसएमई कारोबारी आपस में साझा कर सकते हैं। ऐसे में टेक्नोलॉजी खरीदने पर आने वाली प्रति व्यक्ति लागत बहुत कम हो सकती है।
मौजूदा समय में एसएमई सेक्टर मॉडर्न टेक्नोलॉजी की कमी से जूझ रहा है। कुछ एसएमई कारोबारी चीन और हांगकांग से सेकंड हैंड टेक्नोलॉजी आयात कर रहे हैं। इसके बावजूद एसएमई सेक्टर में टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन का काम बहुत सुस्त गति से चल रहा है। अनिल भारद्वाज का कहना है कि अगर सरकार एसएमई कारोबारियों को टेक्नोलॉजी मुहैया कराने में मदद करती तो इससे एसएमई सेक्टर की वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी।