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सेहत के लिए सब्जि़यों कीकम्पेनियन गार्डनिंग

7 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर इंदौर
टमाटरों के बीच लहसुन और कुछ प्याज़ लगा दें तो टमाटरों में कीड़ा नहीं लगेगा। ककड़ी, आलू और मूली के साथ बीन्स उगा दें तो दोनों सब्जि़यों की ग्रोथ अच्छी होगी। यह है कम्पेनियन गार्डनिंग। इसमें सब्जि़यों के अपने गुण ही अन्य सब्जि़यों की ग्रोथ को बढ़ावा देंगे और काफी हद तक पेस्ट कंट्रोल भी करेंगे। शहर में ऑर्गेनिक फार्मिंग कर रहे लोग भी यह स्मार्ट गार्डनिंग ट्रिक अपना रहे हैं। हेल्थ के साथ यह रीक्रिएशन भी है।
ऑर्गेनिक फूड प्रोडक्ट्स तो ट्रेंड में हैं ही, अब घर में ही ऑर्गेनिक नर्सरी डेवलप करने का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है। कम्पेनियन गार्डनिंग करते हुए सेहत के लिए लोग होमग्रोन वेजीटेबल्स इस्तेमाल कर रहे हैं। घर में ही नर्सरी डेवलप कर रहे हैं और इसमें अपनी जरूरत, अपनी सहूलियत के मुताबिक सब्जि़यां उगा रहे हैं। पिछले दो सालों में यह आंकड़ा तेजी से बढ़ा है और अब तकरीबन २५ फीसदी लोग घर में ऑर्गेनिक वेजीटेबल्स डेवलप कर रहे हैं। जगह के मुताबिक गार्डन में या फिर पॉट्स, हैंगिंग बास्केट्स और पाउचेस में भी सब्जि़यां उगाई जा रही हैं।
हेल्थ के साथ बजटफ्रेंडली भी
देसी सब्जि़यों से लेकर ब्रोकली और लेट्यूस जैसी एक्ज़ॉटिक वेजीटेबल्स भी घर में उगाई जा रही हैं। कुछ परिवारों से हुई बातचीत के मुताबिक सब्जिय़ों पर मासिक आय का ८ से १० फीसदी खर्च हो रहा है। होमग्रोन नर्सरी में सब्जि़यां डेवलप करने से कैमिकल फर्टिलाइज़र्स से उगाई गई सब्जि़यों को भी अवॉइड किया जा सकेगा और बजट पर भी खासा असर होगा।



 लोग अब कम्पेनियन गार्डनिंग की ट्रिक अपना रहे हैं।

एक्सपर्ट टिप्स



एन्वायर्नमेंट फ्रेंडली पेस्ट कंट्रोल

कम्पेनियन गार्डनिंग करने से काफी हद तक पेस्ट कंट्रोल हो सकता है। इस बारे में कृषि विज्ञान एक्सपर्ट मितुल मिश्रा ने बताया कि कई हब्र्स और सब्जि़यां ऐसी हैं जो एक-दूसरे की ग्रोथ में मदद करती हैं। जैसे टमाटरों और आलू के बीच लहसुन लगाने से टमाटरों में कीड़े नहीं लगेंगे। इसी तरह लहसुन और प्याज़ के बीच गाजर उगाने से लहसुन-प्याज़ का पेस्ट कंट्रोल होगा। पत्तागोभी के साथ रोज़मैरी लगाना ठीक रहेगा। कम्पेनियन गार्डनिंग के लिए एक्सपर्ट की सलाह लें या कम्पेनियन गार्डनिंग की बुक्स और ई-बुक्स रिफर करें।

वक्त बिताने का प्रोडक्टिव तरीका

होममेकर लवी छाबड़ा ने भी घर में नर्सरी डेवलप की है। उनका मानना है कि घर में ऑर्गेनिक फार्मिंग सेहत के साथ खुद को एंगेज्ड रखने में भी कारगर है। यह एक रीक्रिएशन है, क्रिएटिव एक्टिविटी है। गार्डनिंग में एक अलग ही जॉय ऑफ एचीवमेंट और सेल्फ सैटिस्फैक्शन मिलता है। बहुत अच्छा लगता है जब बीज में से निकलकर धीरे-धीरे पौधा बढ़ता है। होम नर्सरी में कब वक्त बीज जाता है पता ही नहीं चलता। खाली वक्त का प्रोडक्टिवली यूटिलाइज़ेशन इससे बेहतर क्या होगा। घर में ही फार्मिंग करने से सब्जि़यां बिलकुल फ्रेश मिलती हैं।

धनिया पत्ती और पुदीने को भी रसायन से बड़ा कर रहे

सब्जि़यों को कार्बाइड से बड़ा करने और जल्दी पकाने के बारे में तो सुन ही रहे थे, अब तो लोग धनिया पत्ती, पालक और पुदीने के पत्ते बड़े करने के लिए भी रसायनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। अब तो हर सब्ज़ी में हाइब्रिड मिलेगा।



> खुली छत पर सब्जि़यां न उगाएं। सर्दी में तो नहीं, लेकिन गर्मी के मौसम में पौधे जल जाएंगे। पौधे मॉडरेट सनलाइट वाली जगह पर रखें।

> कीड़े लगने से बचाने के लिए पानी में नीम की पत्तियां पीस कर मिला लें। इसी पानी से सिंचाई करें। मार्केट में लिक्विड ऑर्गेनिक फर्टिलाइज़र्स भी अवेलेबल हैं। ऑर्गेनिक मेन्योर घर में भी तैयार की जा सकती है।

> कम्पेनियन गार्डनिंग स्मार्ट तरीका है पेस्ट्स को दूर रखने का। > कड़ी पत्ता या मिर्च उगाने के लिए ज्यादा बड़े कंटेनर लेने की जरूरत नहीं है।



ये पेस्टिसाइड्स हैं नुकसानदायक

कैल्शियम साइनाइड, मोनोक्रोटो फोर्स, एलड्रीन, कैप्टाफॉल, पैरासियान, नूआक्रोन।

((ये वे पेस्टिसाइड्स हैं जो यूएस और कई अन्य देशों में बैन हैं, लेकिन इंडियन ए्रगीकल्चर में अब भी इनका प्रयोग हो रहा है।))

ये हैं सेफ पेस्टिसाइड्स

फेबेडिला, पायरेथम, निंबोली का तेल और निकोटिन सल्फेट

ये हैं फायदे होम ग्रोन वेजिटेबल्स के

ञ्च सब्जि़यों में कैमिकल और सिंथेटिक पेस्टिसाइड्स इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इनकी ज्यादा मात्रा जहर है।

ञ्च स्वाद के लिहाज़ से घर में उगी हुई सब्जि़यां बेहतर रहेगी।

ञ्च बजट एक बड़ा फैक्टर है। घर में सब्जि़यां उगाने से महीने के बजट पर बड़ा फर्क पड़ेगा।

ञ्च कार्बाइड और अन्य तरह के कैमिकल फर्टिलाइज़र्स डालकर तैयार हुई फसले के लगातार प्रयोग से ऑस्टियोपोरोसिस, माइग्रेन और हाइपरटेंशन और कम उम्र में बाल सफेद होने जैसी बीमारियां भी हो रही हैं।

ञ्च घर में सब्जि़यां उगाना रीक्रिएशन भी हैं। एक जॉय ऑफ एचीवमेंट और सेल्फ सैटिस्फैक्शन मिलेगा।

ञ्च ट्रांसपोर्ट का खर्च भी बचेगा, वक्त बचेगा, फ्यूल बचेगा।

ञ्च सब्जि़यों को कीड़ा लगने से बचाने के लिए घरेलू खादों का उपयोग करें।

त्रक्रह्रङ्खढ्ढहृत्र

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