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भास्कर संवाददाता.इंदौर
फर्जी कमोडिटी एक्सचेंज संचालित करने वाले इंदौर के डिब्बा कारोबारी अमित सांवेर सहित पांच लोगों के खिलाफ मंगलवार को सीआईडी ने चालान पेश किया। सीआईडी ने 22 अलग-अलग धाराओं में अमित पर आरोप तय किए हैं। सीआईडी ने चालान में बताया है डिब्बा कारोबारी अमित सोनी उर्फ अमित सांवेर ने 2 साल में ऑन लाइन एक्सचेंज पर 22 सौ करोड़ के सौदे किए जिसमें से 72 करोड का अवैध कारोबार उसने अपने खुद के साफ्टवेयर मेटाट्रेड-5 के माध्यम किया। इस मेटाट्रेड-5 के जरिए जिसने भी निवेश किया, उसे धोखा ही मिला। लिहाजा, एयू कमोडिटी/मनी हाउस प्राइवेट लिमिटेड के संचालकों द्वारा लोगों से की गई धोखाधड़ी साबित होती है।
मंगलवार दोपहर 12 बजे सीआईडी की टीम ने सीजेएम पंकज सिंह महेश्वरी की अदालत में पांच आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया। इनमें सरगना अमित सोनी, उसका भाई अनुराग सोनी, स्वप्निल भट्ट, नौकर विजय सेमरे और साथी राकेश बत्रा शामिल हैं। इस मामले में अब तक 11 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। आरोपियों ने मेटाट्रेड-5 सॉफ्टवेयर को अपने कम्प्यूटर्स व संबंधित मोबाइल फोन पर इंस्टॉल कर इंदौर, नई दिल्ली, जयपुर और मुंबई जैसे बड़े शहरों के सराफा व्यापारियों को ठगा है। इन शहरों में अमित ने अपने दफ्तरों से इंटरनेट के जरिए एमसीएक्स के समानांतर डमी कमोडिटी एक्सचेंज खड़ा कर लिया था। जिसे वह खुद संचालित करता था। इंदौर सराफा बाजार के कई व्यापारी अमित के डिब्बा कारोबार में उलझकर दिवालिया हो चुके हैं तो कइयों ने आत्महत्या जैसा कदम भी उठया है। 30 अक्टूबर को अमित के खिलाफ फर्जी तरीके से कमोडिटी मार्केट चलाए जाने का मामला सामने आया था।
सायबर सेल ने नहीं की विधिवत कार्रवाई :
दैनिक भास्कर को मिले चालान में इस बात का जिक्र है कि सीआईडी से पहले मामले की जांच कर रही राज्य सायबर सेल ने मामले में विधिवत कार्रवाई नहीं की थी। चालान में लिखा है कि ‘राज्य सायबर एवं उच्च तकनीकी अपराध, जोनल कार्यालय, इंदौर के पुलिस अफसरों द्वारा आरोपियों से संबंधित कम्प्यूटर्स की हार्ड डिस्क, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण व संबंधित दस्तावेज आदि इंदौर में विभिन्न स्थानों से कथित रूप से उनके वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार जमा कर राज्य सायबर एवं उच्च तकनीकी अपराध के भोपाल कार्यालय में 30 अक्टूबर 2013 को जमा कराए गए। उक्त उपकरण व दस्तावेज एकत्रित करने में विधिवत कार्रवाई नहीं की गई है।’
एमसीएक्स का डाटा भी जांचे गी सीआईडी:
सीआईडी सूत्रों ने बताया कि एमसीएक्स का डाटा खंगाले जाने की कार्रवाई भी जल्द शुरू की जाएगी। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने पूरा फर्जीवाड़ा एमसीएक्स के जरिए ही किया है। सीआईडी अब यह जानना चाहती है कि बीते दो साल के भीतर हुई 22 हजार करोड़ रुपए की ट्रेडिंग में एमसीएक्स ने नियमानुसार ट्रेडिंग करवाई गई है या नहीं? इस मामले में जब्त किए गए अन्य सर्वर, कम्प्यूटर और मोबाइल फोन की जांच फिलहाल सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी ((सीएफएसएल)) कर रही है। इसकी रिपोर्ट आनी बाकी है।