- Hindi News
- कमिश्नर के आदेश पर तलाश रहे बाहरी बीएलओ का विकल्प
कमिश्नर के आदेश पर तलाश रहे बाहरी बीएलओ का विकल्प
भास्कर संवाददाता - धार
इंदौर कमिश्नर के आदेश पर स्थानीय कर्मचारी को ही बीएलओ बनाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। प्राथमिकता यह भी है कि बीएलओ गैर शिक्षकीय वर्ग का कर्मचारी ही बने। दोनों मुद्दों को लेकर प्रशासन ने पुराने समय के बाहरी व विकल्प तलाशना शुरू कर दिया है। धार तहसीलदार ने विकासखंड अधिकारियों को पत्र जारी कर ऐसे कर्मचारियों की जानकारी मांगी है।
दरअसल चयनित २५ प्रतिशत शालाओं में गुणवत्ता सुधार की समीक्षा बैठक में इंदौर कमिश्नर ने आदेश किया था कि बीएलओ शैक्षणिक कार्य के बाद निर्वाचन कार्य संपादित करेंगे। यदि शैक्षणिक कार्य के समय निर्वाचन संबंधी कार्य करते पाए गए तो संकुल प्राचार्य, डीपीसी, बीआरसी, बीएसी व जनशिक्षक पर कार्रवाई होगी। इस आदेश के बाद धार तहसीलदार ने धार, तिरला व नालछा विकासखंड के बीईओ, बीआरसी, जनपद सीईओ, परियोजना अधिकारी और संकुल प्रभारी को आदेश जारी किया है। इसमें लिखा है बीएलओ की नियुक्ति करते समय ग्रामीण क्षेत्र में पदस्थ गैर शिक्षक वर्गीय कर्मचारियों को तथा पंचायत सचिव/आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की ड्यूटी प्रथमत: लगाई जाना है। वर्तमान में यदि कार्यकर्ता बीएलओ अन्य किसी गांव में पदस्थ हो तो उस संस्था में पदस्थ कर्मचारी, जिनको बीएलओ नियुक्त किया जा सकता है, उनका नाम प्रस्तावित करें। गौरतलब है पूर्व में शैक्षणिक समय में निर्वाचन कार्य के लिए दूसरे स्थान पर गए बीएलओ पर कार्रवाई की जा चुकी है। वैसे राज्य शिक्षा केंद्र ने शैक्षणिक अमले को निर्वाचन कार्य में नहीं लगाने के निर्देश दिए हुए हैं लेकिन अति महत्वपूर्ण कार्य व अन्य विभागों में पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध नहीं होने का कारण बता कर शिक्षकों को बीएलओ बनाया हुआ है। कमिश्नर के आदेश के बाद नए सिरे से कवायद शुरू की गई है। कलेक्टर सीबी सिंह का कहना है बीएलओ उसी गांव का हो, यही मंशा है।
प्रशिक्षण के बाद भी डी, ई ग्रेड में आए तो शिक्षकों से वसूली
कमिश्नर की समीक्षा बैठक में आए एक सुझाव को भी जिले के सभी स्कूलों में सर्कुलेट करवाया गया है। इसमें बताया है कि डाइट में शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बावजूद बच्चों के गुणवत्ता स्तर में सुधार नहीं होता। बच्चे डी, ई ग्रेड में ही आते हैं। ऐसे शिक्षकों से उनके प्रशिक्षण में हुए खर्च की राशि वसूली जाए।
प्राथमिकता रखी कि कर्मचारी गांव का हो लेकिन गैर शिक्षकीय