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पॉजिटिव टेंडेंसी और कॉन्फिडेंस हैं सक्सेस पाने के अचूक फंडे

7 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर इंदौर
सकारात्मक मनोवृत्ति, आत्मविश्वास और निष्ठा व श्रद्धा सफलता पाने के तीन मूलमंत्र हैं। यही यश और सफलता का राज है। यह विचार मुंबई से आए ख्यात साहित्यकार प्रसाद कुलकर्णी ने व्यक्त किए। वे ‘यशांच गुपीत काय’ विषय पर संबोधित कर रहे थे।
बुधवार को महाराष्ट्र साहित्य सभा के 56वें शारदोत्सव के तहत समर्थ मठ संस्थान और सहकार महर्षि डॉ. तु.सी. अमणापुरकर पारमार्थिक न्यास के सहयोग से व्याख्यानमाला हुई। कार्यक्रम के दूसरे दिन उन्होंने बताया कि कुछ लोगों को 90 फीसदी तक सफलता मिल जाती है, लेकिन बची हुई 10 फीसदी निराशा हाथ लगती है। इससे उबरने के लिए सकारात्मक सोच जरूरी है। सफलता पिरामिड की चोटी पर होती है और मनोदशा उसकी नींव। इसलिए पहला सकारात्मक मनोवृत्ति, दूसरा आत्मविश्वास और तीसरा निष्ठा व श्रद्धा सफलता के लिए जरूरी हैं। चीफ गेस्ट जयंत आप्टे और अशोक आमणापुरकर थे। अतिथि स्वागत अशोक पाटनकर ने किया। संचालन मृगेन गदेवाड़ीकर ने किया। आभार सूर्यकांत मराठे ने माना।




अश्विन खरे ने बताया कि स्व. नरेंद्र धारकर की स्मृति में संस्था जेष्ठ नागरिक संघ और राम मंदिर ट्रस्ट लोकमान्य नगर की ओर से 30 जनवरी को व्याख्यान लोकमान्य नगर में होगा। इसमें अरविंद दीक्षित ‘भाषेचे राजकरण’ विषय पर संबोधित करेंगे। समय शाम 7 बजे रहेगा।

‘भाषेचे राजकरण’ पर व्याख्यान आज

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महाराष्ट्र साहित्य सभा के शारदोत्सव में बुधवार को साहित्यकार प्रसाद कुलकर्णी ने सक्सेस पाने के फंडे बताए।