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नासा की मदद से बना है यह नोज फिल्टर

7 वर्ष पहले
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डीबी स्टार :इंदौर

अमेरिका के वैज्ञानिक मिकार्मिक टॉबी ने नासा की मदद से इस समस्या से निपटने के लिए इनहेल फ्रेश नोज फिल्टर विकसित किया है। दिखने में यह छोटा है। यह इलर्जी, प्रदूषण डस्ट स्मोक और यहां तक की हवा में फैले वायरस से भी बचाता है। अंगुलियों की मदद से नाक के अंदर इसे फिट करना होता है।

इसके ऊपर लगे सेल्यूलर कॉपर और एक्टीवेटेड कार्बन की कोटिंग वायु में मौजूद डस्ट स्मोक एलर्जिक पार्टिकल और सामान्य वायरस को शरीर में घुसने से रोक देता है। यह नोस्टल को खोलकर ज्यादा ऑक्सीजन लेने में मदद करता है। भारत में तीन महीने पहले मुंबई की ब्रेड इंटरप्राइजेज कंपनी ने इसे इंपोर्ट करना शुरू किया है।

हर कोई अपना रहा है नोज फिल्टर

वायु प्रदूषण दो तरह का होता है गैस और सस्पेंड पार्टिकल मैटर यानी धूल कण पाटिकुलेड मैटर हवा में वह सूक्ष्म कण व प्रदूषण है जो आंखों से दिखाई नहीं देता है लेकिन सांसों के जरिए फेफड़ों में जाकर उसे नुकसान पहुंचाता है। स्प्रे पेंट, ऑटोमोबाइल, स्टोन कटिंग, ग्लास कटिंग, लकड़ी का काम करने वाले सस्पेंड पार्टिकुलर मैटर वाले वायु प्रदूषण के शिकार हो रहे हैं। यह काम करने वालों की सांस के साथ बारीक कण भी फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं। नतीजा फेफड़ों में नुकसान होना शुरू हो जाता है। इन सभी ने अपना काम करने के लिए नोज फिल्टर का उपयोग करना शुरू कर दिया है। किसी भी तरह के प्रदूषित माहौल में काम करने वाले के लिए यह बहुत मददगार साबित हो रहा है। खेतों में यूरिया कीटनाशक के छिड़काव करने के लिए भी किसान इसका उपयोग कर रहे हैं। डीबी स्टार की पड़ताल के मुताबिक तिल्लोर के 450 से ज्यादा किसानों ने खेतों में काम करने के लिए एक साथ नोज फिल्टर मंगवाए हैं।



प्रदूषण से बचने में ...पेज 1 से जारी

1. डिवाइस के पैकेट पर दिया है इस्तेमाल का तरीका

2.साइज में छोटा लेकिन बड़े काम का है यह उपकरण

3. प्रदूषध से बचने संबंधी जानकारी भी साथ ही दी गई है।

जाने-माने 500 वैज्ञानिकों की रिसर्च के मुताबिक भारत में वायु प्रदूषण मौत का पांचवां सबसे बढ़ा कारण है। 67 फैक्टर को इस रिसर्च में लिया गया था, इसमें लड प्रेशर मेल्यूड्रेशन देखा और तमाम ऐसे फैक्टर लिए जिनसे मौतें हो रही हैं। यह बहुत हैरान करने वाली बात है कि पूरी दुनिया में दस बड़े फैक्टर में से एक वायु प्रदूषण है। कार्बन मोनो ऑक्साइड, कार्बन डाय ऑक्साइड हमारे शरीर में घर कर रही है। दुनिया में 32 लाख लोग हर साल वायु प्रदूषण की वजह से मर रहे हैं। भारत में यह आंकड़ा 6 लाख से ज्यादा है। रिचर्स से यह भी पता चला है कि वायु प्रदूषण से देश की एक तिहाई आबादी खतरे में है। 201२ में भारत में 6 लाख बीस हजार लोगों की जान वायु प्रदूषण की वजह से हुई है।

यह आंकड़ा पिछले दस सालों में छह गुना तक बढ़ गया है। रिसर्च के मुताबिक भारत में प्रदूषण टॉप 10 ह्यूमन किलर कारणों में से एक हैं। सांस और दिल से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही है मौत की पांचवीं सबसे बड़ी वजह है। शहरी इलाकों में खतरा ज्यादा है। पूरे देश की एक तिहाई आबादी खतरे में है। शहरी इलाके का हर दूसरा आदमी वायु प्रदूषण वाले इलाके में रह रहा है। देश के 55 फीसदी लोग जवान है यानी इनका एक तिहाई खतरे में है। जाहित से बात है कि आने वाले दिनों की युवा पीढी बीमार होगी।

वायु प्रदूषण है मौत का पांचवां बड़ा कारण



 प्रदूषण से बचने के लिए अपना रहे हैं यह नोज फिल्टर

मुंबई और इंदौर की स्थिति प्रदूषण के मामले में लगभग एक जैसी ही है। हमने तीन पहले ही नोज फिल्टर को इंपोर्ट करना शुरू किया था। इसे मुंबई और इंदौर में सबसे ज्यादा खरीदा जा रहा है। इंदौर में धूल और धुएं से परेशान लोग इसे ज्यादा अपना रहे हैं। सिर्फ एक सप्ताह में यहां 10 हजार से ज्यादा लोगों ने नोज फिल्टर का उपयोग करना शुरू कर दिया है।

कुलविंदर बाथ, सीईओ ब्रेड इंटरप्राइजेज

 धूल से बचाता है

मुझे रोज दो से तीन घंटे बाइक चलाना पड़ती है। इंदौर की सड़कों पर धूल की समस्या बहुत ज्यादा है। हेलमेट लगाने के बाद भी धूल से परेशानी होती है। मैंने नोज फिल्टर लगाकर बाइक ड्राइव की तो सांस लेने में तकलीफ नहीं हुई। अब मैं हेलमेट के साथ ही नोज फिल्टर जरूरत इस्तेमाल करता हूं। इससे मुझे धूल से सांस की तकलीफ नहीं होती है।

कपिल तिवारी, वाहन चालक



वातावरण के डस्ट स्मोक और एलर्जिक पार्टिकल्स से बचाने में मददगार साबित हो सकती है यह डिवाइस