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आंतरिक रूप से प्रेम में ऊंचा उठना होगा

7 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर इंदौर
आज यंग जनरेशन आइसक्रीम-पिज्जा को भी कहती है कि आई लव इट और व्यक्ति को देखकर भी यही कहती है। और यदि सबके लिए इतना प्रेम है तो फिर चारों तरफ शांति और आनंद होना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है। जाहिर है हम जिसे प्रेम कह रहे हैं वह असल प्रेम नहीं है। हमने प्रेम शब्द को डिवैल्युएट कर दिया है। प्रेम ज्यादा गहरा और अर्थ वाला है। इसे समझने और महसूस करने के लिए बाहरी नहीं आंतरिक रूप से ऊपर उठना होगा। तभी हम प्रेम के व्यापक अर्थ को ग्रहण कर सकते हैं।
यह बाद कही चिन्मय मिशन के स्वामी तेजोमयानंद ने। वे गुरुवार को मिशन के माताश्रय ऑडिटोरियम में राइज इन लव वर्कशॉप में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कोई तमो गुण तो कोई रजो गुण के आधार पर ऊंचा उठता है, लेकिन यह अर्थवान नहीं है। यदि आप सात्विक गुण से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्र को भी ऊंचा उठाते हैं तो यह उठना ज्यादा मायने रखता है। प्रेम निष्काम होगा तो अर्थवान होगा। निष्काम प्रेम में पाने की अपेक्षा नहीं होती बल्कि देने का ही निस्वार्थ भाव होता है।
फिल्ट्रेशन और फ्लर्टेशन
स्वामीजी ने युवाओं की मौजूदगी पर कहा कि एक बार साइंस जैसे रूखे सब्जेक्ट फिल्ट्रेशन पर लेक्चर रखा गया। वहां भीड़ हो गई। आयोजकों को समझ नहीं कि साइंस सब्जेक्ट पर लेक्चर में इतनी भीड़ क्यों है? पता चला कि नोटिस बोर्ड पर जो सूचना लगाई गई थी उसमें फिल्ट्रेशन की जगह फ्लर्टेशन लिख दिया गया। इसी तरह आज यदि राइज इन लव की बजाय फॉलिंग इन लव सब्जेक्ट होता तो युवाओं की भीड़ आ जाती।



आज के युवा प्रेम को लेकर बहुत पजेसिव और ऑब्सेसिव होते हैं। वे इतने पजेसिव होते हैं कि अपने पार्टनर को दूरबीन लगाकर वॉच करते हैं और इतने ऑब्सेसिव होते हैं कि किसी ने प्रेम करने से इनकार किया तो वे तेजाब फेंक देते हैं। इसलिए प्रेम को पहले गहराई से समझें। ढाई आखर प्रेम का पढ़े से पंडित होय। वर्कशॉप में प्रेम के भाव को लेकर स्पीचलेस वीडियो क्लिपिंग भी दिखाई गई और फिर छोटे छोटे ग्रुप्स में सब्जेक्ट पर डिस्कशन हुआ।



आज- रवींद्र नाट्य गृह में भजगोविंदम महोत्सव में शुक्रवार को शाम 6.30 बजे से 8 बजे तक स्वामी तेजोमयानंदजी के प्रवचन होंगे।

पजेसिव और अंॉब्सेसिव न हों



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