पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • स्वयंवर हो तब भी मां ही चुनेंगी मेरी दुल्हन

स्वयंवर हो तब भी मां ही चुनेंगी मेरी दुल्हन

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
सिटी रिपोर्टर इंदौर
टीवी शो महाभारत में इन दिनों द्रौपदी के स्वयंवर की सीक्वेंस फिल्माई जा रही है। इस शो में अर्जुन का किरदार निभा रहे शाहिर शेख प्रमोशनल विजि़ट पर गुरुवार को शहर में थे। रील लाइफ में तो वे स्वयंवर का दृश्य कर ही रहे हैं, लेकिन अगर रियल लाइफ में ऐसी परिस्थिति बने और उनके लिए स्वयंवर रखा जाए तो वे क्या करेंगे? जवाब में उन्होंने कहा ‘स्वयंवर तो वह मेरा ही कहलाएगा, लेकिन वहां भी मेरी दुल्हन तो मेरी मां ही चुनेंगी।’
जम्मू के शाहिर शेख का कहना है कि शो से उन्हें जो उम्मीदें थीं, वह उससे भी बेहतर परफॉर्म कर रहा है। वे जहां भी जा रहे हैं बच्चे उन्हें पहचान रहे हैं और किरदारों के नाम से ही पुकार रहे हैं। सिटी भास्कर से खास बातचीत में उन्होंने क्या कहा, पढि़ए उन्हीं के शब्दों में-



अर्जुन और कृष्ण बना रहे

मुझे बेहतर इंसान

मैं उस सीक्वेंस का इंतजार कर रहा हूं जब रणभूमि में अर्जुन अपनों पर वार नहीं कर पाता और हथियार डाल देता है। फिर कृष्ण उसे उपदेश देते हुए भगवत गीता की रचना करते हैं। मुझे वह उपदेश सुनना है। मुझे लगता है कि शो में कृष्ण के संवाद, उनकी सोच और हर परिस्थिति से निपटने का उनका नज़रिया मुझे और बेहतर इंसान बना रहा है। जब भी मैं रियल लाइफ में किसी प्रॉब्लम में होता हूं तो सोचता हूं कि कृष्ण या अर्जुन इस जगह होते तो क्या करते। तुरंत फैसला कर पाता हूं और नतीजे बहुत शानदार मिलते हैं।

एक जैसी हैं कुरआन और गीता

कुरआन शरीफ मैंने पढ़ी है। भगवत गीता के बारे में मैं शो की शूटिंग पर जानने लगा हूं। शो में जब भी कोई विकट परिस्थिति आती है तो कृष्ण उसे सुलझाते हैं। अब तक ८४ एपिसोड शूट हो चुके हैं और इस दौरान मैंने महसूस किया कि कुरआन और गीता, दोनों एक जैसी हैं। जो फलसफे मैंने इस्लाम में सीखे हैं, वैसे ही हिंदू धर्म भी बताता है। अब मैं यह सोचता रहता हूं कि क्यों दो एक जैसी विचारधाराएं अलग हो गई हैं और यह खाई पट ही नहीं रही है।

अब बच्चों को सुपरमैन नहीं, भीम बनना है

मुंबई जैसे मेट्रो शहरों में डेली सोप्स का उतना क्रेज़ नहीं है। मैं खुश हूं कि महाभारत के साथ ऐसा नहीं है। मुंबई में भी लोग और खासतौर पर बच्चे हमें पहचान लेते हैं और कैरेक्टर के नाम से पुकारते हैं। मुझे खुशी होती है जब उनके पैरेंट््स कहते हैं कि हमारे बच्चे सुपरमैन नहीं, भीम और अर्जुन जैसा बनना चाहते है। यही तो हम चाहते थे हमारी नई पीढ़ी का परिचय उन रियल लाइफ हीरोज़ से हो जिनके वे अग्रज हैं।

ह्रहृश्व- ञ्जह्र-ह्रहृश्व