आउट ऑफ द बॉक्स सोचने की जरूरत
सिटी रिपोर्टर इंदौर
ग्लोबल प्रॉस्पेरिटी के लिए एक ठोस दृष्टिकोण की बहुत जरूरत है। लोगों, पर्यावरण एवं प्रक्रियाओं में विकास के लिए ज्ञान का माहौल भी बहुत जरूरी है। यह बात यूनिवर्सिटी के कुलपति डीपी सिंह ने कही। वे प्रेस्टीज इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च में गुरुवार को शुरू हुई दो दिनी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे। विषय था-मैनेजिंग पीपल, प्रोसेसेस एंड एन्वार्यमेंट फॉर ग्लोबल प्रॉस्पेरिटी। उन्होंने कहा कि हमें भी गांधी की तरह ही ग्लोबल प्रॉस्पेरिटी के लिए शांति और अहिंसा को मूलमंत्र बनाकर आगे बढऩा होगा। जबकि सम्मानित किए गए आदित्य अग्रवाल ने कहा कि हमें आउट ऑफ बॉक्स सोचने की जरूरत है।
अनेकता है मूलमंत्र
यूनिवर्सिटी ऑफ नेशंस, यूएसए के इंटरनेशनल एचआर डायरेक्टर डॉ. अह की लीम ने कहा कि भारत विभिन्न संस्कृतियों का देश है। अनेकता में एकता इसका मूलमंत्र है लिहाजा यह एक क्रास कल्चर का बेहतरीन उदाहरण है। इंडिया इनोवेशन फंड के सीओओ अश्विन रघुरामन ने कहा कि उद्यमी तो वह है जो लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है जबकि क्रेडिट इन्फॉर्मेशन ब्यूरो ऑफ इंडिया लि. के आदित्य अग्रवाल ने कहा कि आउट ऑफ बॉक्स सोचने की जरूरत है।
अवॉर्ड भी दिए
अश्विर रघुरामन को यंग एंटरप्रेन्योर अवॉर्ड, आदित्य अग्रवाल को को पीआईएमआर आउटस्टैडिंग अलुमनी अवॉर्ड, प्रियंका मित्तल को वुमन एंटरप्रेन्योर अवॉर्ड देकर सम्मानित किया गया। शुरुआत में प्रेस्टीज एजुकेशन सोसायटी के अध्यक्ष एनएन जैन ने इस कॉन्फ्रैंस के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। इस मौके पर कॉन्फ्रेंस बुक अभिज्ञान और ब्रोशर जारी जारी किए गए।