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डेढ़ साल बाद भी नहीं हुई एमफिल की परीक्षा

7 वर्ष पहले
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ञ्चप्राचार्य को कुलसचिव के नाम ज्ञापन देकर रखी अपनी बात
भास्कर संवाददाता - बड़वानी
डेढ़ साल बाद भी एमफिल की परीक्षा नहीं हुई। मंगलवार को विद्यार्थियों का गुस्सा फूट पड़ा। अभाविप कार्यकर्ताओं के साथ नारे लगाकर रोष जताया। प्राचार्य को देवी अहिल्या विश्व विद्यालय ((डीएविवि)) इंदौर के कुलसचिव के नाम ज्ञापन सौंपकर मांग की। विवि प्रबंधन की लापरवाही से विद्यार्थियों का भविष्य खराब करने का आरोप लगाया है। साथ ही एमए हिन्दी साहित्य प्रथम सेम की परीक्षा में हुई गड़बड़ी पर रोष जताकर उचित कार्रवाई की मांग की। उन्होंने प्राचार्य को ज्ञापन देने के साथ ही विवि प्रबंधन द्वारा एक माह के भीतर परीक्षा नहीं कराने पर आंदोलन करने की चेतावनी भी दी। अभाविप के जिला संयोजक विक्रम चौहान ने बताया इतिहास, अर्थशास्त्र व प्राणिकी विषय में एमफिल कक्षाओं की शुरुआत शिक्षा सत्र 2012-13 में हुई थी। एमफिल में प्रवेश लेने बाद अभी तक प्रथम सेम की परीक्षा नहीं हुई है। उधर, बीकॉम द्वितीय सेम के विद्यार्थियों को बगैर हस्ताक्षर व सील के अंकसूची वितरित करने पर भी हंगामा किया। श्री चौहान ने बताया करीब 3 माह पहले विद्यार्थियों ने हस्ताक्षर के लिए अंकसूची जमा कराई थी लेकिन अभी तक संबंधित विद्यार्थियों को अंकसूची प्राप्त नहीं हुई है। इसी तरह परिषद के कार्यकर्ताओं ने एमए हिन्दी साहित्य प्रथम सेम की परीक्षा में पिछले दिनों पाठ्यक्रम से बाहर के प्रश्न पूछने पर आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कुलसचिव के नाम प्राचार्य डॉ. यादव को ज्ञापन सौंपकर नवीन पाठ्यक्रम अनुसार परीक्षा लेने की मांग की। उन्होंने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी। इस दौरान सावन शर्मा, गौरव व्यास, अनीता किराड़े, ज्योति जोशी, श्वेता जायसवाल, गायत्री चौहान, प्रियंका चौहान, कलोकेश धनगर, पंकज यादव, गीना डावर, राकेश डोडवे, प्रीति जैन, नेहा पाटीदार, बबलू चौहान उपस्थित थे।




विवि प्रबंधन ने नहीं कराई परीक्षा, ज्ञापन के साथ भेजेंगे पत्र



॥परीक्षा लेना विवि प्रबंधन की जिम्मेदारी है। एमफिल के विद्यार्थियों की परीक्षा के लिए पिछले वर्ष कई बार पत्र लिखा। कॉलेज प्रबंधन से प्रतिनिधि भेजकर परीक्षा के लिए मार्गदर्शन मांगा गया। इसके बावजूद परीक्षा नहीं हुई। विद्यार्थियों के ज्ञापन को कुलसचिव को फैक्स करेंगे। साथ ही प्रबंधन द्वारा भी पत्र लिखा जाएगा ताकि शीघ्र परीक्षा हो सके।

डॉ. एसएन यादव, प्राचार्य एसबीएन पीजी कॉलेज बड़वानी।

> एक माह में नहीं कराई तो आंदोलन