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वास्तुशास्त्र से होंगे विकास कार्य, पर्यटकों को मिलेगा आध्यात्मिक लाभ
भास्कर संवाददाता - बड़वानी
विश्व प्रसिद्ध जैन तीर्थ सिद्धक्षेत्र बावनगजा में नए मास्टर प्लान के तहत विभिन्न विकास कार्य वास्तुशास्त्र के अनुसार होंगे। वैसे तो यह पूरी तरह से सिद्ध है लेकिन इसमें हुए कुछ निर्माण कार्यों के आंशिक वास्तुदोष को दूर करने के लिए यह प्रयोग किया जा रहा है। इसके तहत प्रकृति की सकारात्मक ऊर्जा को प्रदान करने वाले नए शिल्पकारीयुक्त भवन सहित अन्य विकास कार्य कराए जा रहे हैं। इसके लिए पं. बंगाल के कलकत्ता के वास्तुशास्त्री एवं इंजीनियरों की मदद ली जा रही है। इन इंजीनियरों ने वास्तु के हिसाब से सारे मापदंडों की जांच परख कर निर्माण शुरू कराया है। ऐसा करने से यहां आने वाले पर्यटकों को बेहतर प्राकृतिक वातावरण के बीच तनावमुक्ति के साथ शांति और आध्यात्मिक लाभ मिलेगा।
बावनगजा ट्रस्ट के अध्यक्ष राजकुमार जैन, सहमंत्री जितेंद्र जैन एवं प्रबंधक इंद्रजीत मंडलोई ने बताया वर्ष 2013-14 के मास्टर प्लान के तहत यह काम कराया जा रहा है। सिद्धक्षेत्र में इस प्लान के तहत जो भी निर्माण कराया जा रहा है वह पूरी तरह से वास्तुशास्त्र के अनुसार ही कराया जा रहा है। इसके लिए कलकत्ता के प्रसिद्ध वास्तुशास्त्री डॉ. संपत सेठी एवं उनकी टीम की मदद ली जा रही है। श्री सेठी ने बताया वास्तुशास्त्र के हिसाब से भवनों का निर्माण करा रहे है ताकि जो भी आंशिक वास्तुदोष है उसे पूरी तरह से दूर किया जा सके। कुछ अन्य नवीन प्रतिमाओं को ईशान कोण में स्थापित कर रहे हैं। ऐसा करने से यहां की पूरी सकारात्मक प्राकृतिक ऊर्जा का लाभ यहां आने वाले सभी श्रद्धालुओं को मिलेगा।
वादियों के बीच मिलेगा नया औषधीय बगीचा - क्षेत्र में वादियों के बीच एक नवीन औषधीय बगीचा आकार लेगा। इसकी तैयारी पूरी हो गई है। इसमें औषधीय पौधे लगाए जाएंगे वहीं पर्यटकों की सारी सुविधाओं की दृष्टि से अन्य विकास कार्य होंगे। इन सब में करीब चार करोड़ रुपए खर्च होंगे।
यह है प्रकृति की सकारात्मक ऊर्जा
प्रकृति में पंचतत्वों की अप्रत्यक्ष ऊर्जा को ही प्राकृतिक ऊर्जा कहते हैं। यह एक सकारात्मक ऊर्जा होती है। पंचतत्वों में अग्नि-समीधा, हवा, पानी, भूमि, आकाश शामिल है। वास्तुशास्त्र में इन पंचतत्वों को ध्यान में रखते हुए दिशाओं की ऊर्जा का सही सदुपयोग करने के लिए वास्तु अनुसार निर्माण कार्य किए जाते हैं ताकि इससे संपर्क में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति सकारात्मक ऊर्जा के लाभ से लाभांवित हो सके। प्रकृति की अप्रत्यक्ष सकारात्मक ऊर्जा का मानव जीवन पर गहरा असर रहता है। इसका लोगों के मानस, दिनचर्या, खान-पान, व्यवहार, स्वास्थ्य, भविष्य आदि पर प्रभाव पड़ता है। यह वहां के वातावरण पर निर्भर करता है। वास्तु के विपरीत वातावरण होने पर नकारात्मक ऊर्जा की संभावना रहती है।
प्रकृति की दिशाओं से ऊर्जा प्राप्त करना वास्तुशास्त्र
वास्तुशास्त्री डॉ. संपत सेठी ने भास्कर से चर्चा में बताया वास्तु शास्त्र प्रकृति की सभी दिशाओं से पंचतत्वों के साथ सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का प्राचीन वैदिक सफल माध्यम है। इस ऊर्जा से प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक लाभ मिलता है।
ये होंगे वास्तु के अनुसार विकासकार्य
: बावनगजा में 7000 वर्गफीट में वास्तुशास्त्र के अनुसार अत्याधुनिक भोजन शाला का निर्माण कराया जा रहा है। छह हजार वर्गफीट में पंडाल बनेगा।
: 52 कक्षों की नवीन धर्मशाला एवं दो लाख लीटर की एक पेयजल टंकी का निर्माण होगा।
यह होगा पर्यटकों को लाभ
: वास्तुयुक्त भवनों में तनावमुक्ति का लाभ मिलेगा।
: पूर्णतया शांत क्षेत्र रहने से पूरा आध्यात्मिक वातावरण मिलेगा।
: शुद्ध सात्विक भोजन के साथ सही आहारचर्या की सीख।
: परिवार के साथ छुट्टियां बिताकर कुछ दिन यहां रूकने वाले पर्यटकों को अध्यात्म की बेहतर शिक्षा।
: ईको टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।