मानव निर्मित विपदाओं को कम करना चाहिए
भास्कर संवाददाता - बड़वानी
प्रकृति से छेड़छाड़ का खामियाजा हमें भुगतना पड़ रहा है। प्राकृतिक आपदा/विपदा के साथ मानव निर्मित विपदाओं में वृद्धि हुई है। इन्हें रोकने के लिए हमें अभी से सजग व सतर्क होने की जरूरत है। वर्तमान में नदियों में प्रदूषण बढ़ गया है। शहर का सारा कचरा नदियों में डाला जा रहा है। हम पॉलीथिन थैली का उपयोग कर इसे नालियों में फेंक देते हैं। बारिश के दौरान पॉलीथिन से नालियां चोक हो जाती है। इससे पानी का बहाव अवरूद्ध हो जाता है। इस तरह की कई विपदाएं मानव निर्मित हैं, जिन्हें हम समय रहते कम कर सकते हैं। होमगार्ड कार्यालय में गुरुवार को इंदौर से आए कंपनी कमांडर एससी राय ने यह बात कही। यहां आपदा प्रबंधन पर दो दिनी प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू हुई। श्री राय ने अक्टूबर २०१३ में दतिया का रतनगढ़ हादसा, भोपाल गैस कांड, ट्रेन व अन्य वाहनों के बीच होने वाली दुर्घटनाओं में होने वाली क्षति की जानकारी दी। डॉ. सुमेरसिंह सोलंकी ने बाढ़ से पहले की तैयारी, बाढ़ के दौरान बचने के उपाय, बाढ़ के बाद क्या किया जाए, घरेलू आपातकालीन वस्तुओं का उपयोग, घर छोडऩे की सलाह पर क्या करें, बाढ़ में डूबते व्यक्ति को कैसे बचाएं आदि की जानकारी दी। इसके पहले कलेक्टर शोभित जैन ने प्रशिक्षण का शुभारंभ किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में एसपी जितेंद्रसिंह, जीडीसी प्राचार्य डॉ. आरआर कान्हेरे, होमगार्ड बड़वानी के कंपनी कमांडर आरएल भूरिया, एनएसएस व एनसीसी कैडेट्स, राजस्व निरीक्षक, सरपंच पटवारी व सचिव उपस्थित थे।
इन विपदाओं की दी जानकारी - बाढ़, भूकंपन, भूस्खलन, हिमस्खलन, चक्रवात, सुनामी, बवंडर, तूफान, ओलावृष्टि, गर्म व शीत हवाएं, समुद्री कटाव, अकाल, भूगर्भीय विपदाएं, बांधों का टूटना, खदानों में आग लगना, गैस रिसाव, परमाणु विपदा, गांव/शहर व जंगल में आग लगना।
भूकंपन का क्षेत्र है बड़वानी - प्रशिक्षक श्री राय व डॉ. सोलंकी ने कहा बड़वानी जिले में बाढ़ व आंशिक भूकंपन विपदा वाला क्षेत्र है। डॉ. सोलंकी ने मार्च २०१३ में हुई राजघाट पुल से नर्मदा में वाहन गिरने की घटना को मानव निर्मित विपदा बताया। प्रशिक्षकों ने बाढ़, भूकंपन व आगजनी की घटना से बचने के उपाय बताए।
आपदा प्रशिक्षण कार्यशाला में अपनी बात रखते कंपनी कमांडर एससी राय।
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