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डाउनलोड करेंखंडवा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी ((पीएचई)) विभाग के १५ फीसदी हैंडपंप बेकार निकले। खंडवा जिले में ३५८ हैंडपंप ऐसे हैं, जहां पानी बिल्कुल भी नहीं निकला है। इसका कारण विभाग के पास भू-जल वैज्ञानिक नहीं है, वे ठेका पद्धति से इसका सर्वेक्षण करा रहे हैं।
इसी लापरवाही के कारण पांच साल में दो करोड़ रुपए गड्ढे में चले गए हैं। जिले के ग्रामीण इलाकों में पीएचई ने २००९-१० से अब तक २४०० हैंडपंप खनन किए हैं। इनमें से ३५८ हैंडपंप खराब है। यहां पर या तो पानी का लेवल कम है या फिर बिल्कुल नहीं है।
विभाग ने इन बंद पड़े हैंडपंप पर दो करोड़ १४ लाख ८० हजार रुपए खर्च कर दिए हैं। विभाग को एक हैंडपंप खनन पर औसतन ६० हजार रुपए खर्च होते है। जिन हैंडपंप से पानी निकल जाता है, उसमें औसतन एक लाख २५ हजार रुपए का खर्च आता है।
पिछले दो साल के आंकड़े ले तो २०१२-१३ में विभाग ने ७५५ खनन किए थे, इसमें से ८८ हैंडपंप खराब है। यानी इस साल ११.६५ फीसदी पंप बेकाम साबित हुए है। इस वित्तीय वर्ष में विभाग ने ६२० खनन किए है, इनमें से १०७ हैंडपंप ऐसे हैं, जिनमें पानी नहीं निकला है। इस साल हैंडपंप खराब होने का ग्राफ बढ़कर १७.२५ प्रतिशत हो गया है।
३५८ हैंडपंप खराब है
जिले में कुछ हैंडपंप बेकाम हुए है। इनकी संख्या ३५८ हैंडपंप खराब है। सर्वे प्राइवेट कंपनी के माध्यम से कराया जाता है।
- बीएस बारस्कर, कार्यपालन यंत्री पीएचई
रजिस्टीविटी से होता है सर्वे
खनन के पहले रजिस्टीविटी सर्वे होता है। रजिस्टीविटी मीटर जमीन पर रख दिया जाता है। चारों दिशा में तार लगा दिए जाते हैं। इससे पानी की गहराई पता लगाई जा सकती है। भू-जलविद वैज्ञानिक के मुताबिक 100 मीटर तक तार चारों तरफ बिछाए जाते हैं तो इसके आधे रिजल्ट मिलेंगे।
((आंकड़े पीएचई के मुताबिक, २०१३-१४ की जानकारी २१ जनवरी तक))
वर्ष इतने खनन सफल असफल
२००९-१० ३९९ ३४६ ५३
२०१०-११ २२९ १८४ ४५
२०११-१२ ३९७ ३३२ ६५
२०१२-१३ ७५५ ६६७ ८८
२०१३-१४ ६२० ५१३ १०७
किस साल, इतने खनन हुए हैंडपंप
१५ फीसदी हैंडपंप बेकार लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा पांच साल में खोदे २४०० हैंडपंप में से ३५८ में नहीं निकला पानी
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