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- पायल बोली आश्रम के बच्चों से भी मिलने नहीं देते
पायल बोली आश्रम के बच्चों से भी मिलने नहीं देते
भास्कर संवाददाता - खंडवा
बच्चों से मिलने भी नहीं देते, मेरा कमरा भी अलग कर दिया, अब मुझे वहां बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा। गंगराड़े अंकल ((हिंदू बाल सेवा सदन के अधीक्षक)) ने कहा तू अस्पताल जा रही है तो वहां पर ही भर्ती हो जाना।
मोघट टीआई रवींद्र यादव और पुलिसकर्मियों को सोमवार दोपहर यह पीड़ा बताते हुए पायल की आंखें भर आई। जिला अस्पताल की स्टाफ नर्स ट्रेजा पारे की दत्तक पुत्री भूमिका उर्फ पायल को सुरक्षा और संरक्षण के लिए बाल कल्याण समिति द्वारा बाल गृह भेजा था, ताकी उसे घर जैसी सुविधाएं मिले लेकिन यहां हुआ उल्टा। पायल के बुरे हाल हो गए। सिर में जुएं इतनी हो गई कि खुजा-खुजाकर जख्म हो गए। जो दो सप्ताह बाद भी नहीं भर पाए। मोघट पुलिस के एक जवान और महिला आरक्षक के साथ पायल प्रतिदिन जिला अस्पताल में ड्रेसिंग के लिए आ रही है। कायदे से उसका इलाज बाल गृह में ही होना चाहिए था। यहां सुविधाएं नहीं मिलने से पायल के बुरे हाल हो गए। मामले से जिम्मेदार भी कन्नी काट रहे हैं।
भास्कर में खबर प्रकाशित होने के बाद हमने परीविक्षा अधिकारी को जांच के निर्देश दिए हैं। गुरुवार तक जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्यवाही करेंगे। ø
- राजेश शुक्ला, अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति
पायल ने श्री गंगराड़े की शिकायत की है। तत्काल उनसे बात की। उनका कहना है पायल ने ही अलग कमरे की मांग की थी। यदि ऐसी बात है तो उसे बच्चों के साथ ही शिफ्ट करवा देंगे। ø
- रवींद्र यादव, टीआई, मोघट थाना
यह सुविधाएं मिलनी थी बाल गृह में
पायल को बाल गृह में स्कूली शिक्षा, म्यूजिक, डांस, योगा व्यवसायिक शिक्षक, इलाज के लिए डॉक्टर सहित घर जैसी सुविधाएं मिलना चाहिए लेकिन यह सब नहीं मिल सकी। हिंदू बाल सेवा सदन को शासन द्वारा बाल गृह का दर्जा दिया है। इसके लिए शासन द्वारा लाखों रुपए की राशि दी जाती है, ताकि बच्चे को परेशानी न हो।
किसी से मिलने भी नहीं देते
हिंदू बाल सेवा सदन में पायल को बाल सुधार गृह की तरह रखा जा रहा है। जैसे कोई नाबालिग को अपराध करने के बाद रखा जाता है। पायल से मिलने गई जिला अस्पताल की कुछ नर्स और अन्य लोगों ने बताया कि उससे मिलने नहीं देते।
: पायल को बच्चों से अलग क्यों किया ?
ञ्च उसने शिकायत की थी कि मेरे साथ बच्चे मारपीट करते हैं, मेरा सामान भी फेंक देते है, इसलिए।
: पायल के सिर में इतनी जुएं कैसे हो गई आपने ध्यान क्यों नहीं दिया ?
ञ्च महिला पुलिस की ड्यूटी है, वह खुद सामने बैठकर नहलाते हैं।
: पायल का आरोप है कि आप कहते हैं अस्पताल में ही भर्ती हो जाना ?
ञ्च मेरे भी बच्चे है, भला मैं ऐसा क्यों कहूंगा।
: पायल को स्कूल नहीं भेज सके तो ट्यूशन ही
पढ़ा लेते ?
ञ्च स्कूल के लिए कोई निर्देश नहीं दिए हैं, हमारे यहां पायल को अस्थायी रूप से दिया है, वह पुलिस संरक्षण में है।
: लेकिन बाल गृह में तो घर जैसी सुविधाएं होनी चाहिए, उसमें निर्देश वाली कौन-सी बात है ?
ञ्च आप आकर देख लेना कैसी सुविधा है।
थाना मोघट परिसर में सोमवार दोपहर महिला आरक्षकों ने पायल का सिर धोकर जूं की दवाई डाली। इस दौरान पायल के सिर से टपा-टप जुएं गिरी। जख्म गीले होने के कारण पायल के बाल काटना भी मुश्किल हो गया। सिर में दवा डालने के बाद पायल को सुकून महसूस हुआ।
थाने में धुलाया सिर, जूं की दवा लगाई
: बाल गृह में नहीं हो रही पायल की देखभाल :थाने लाकर धोएं बाल और सिर में डाली दवाई
सीधी बात
एससी गंगराड़े, अधीक्षक, हिंदू बाल सेवा सदन