कार्यशाला में सो गए जवान
: कलेक्टर, एडीएम के इंतजार में एक घंटे देरी से शुरू हुई कार्यशाला
:होमगार्ड कार्यालय में आज नगर निगम के फायर विभाग को देंगे प्रशिक्षण
भास्कर संवाददाता - खंडवा
बाढ़, भूकंप और भीषण आग जैसी आपदा से निपटने के लिए जिला स्तरीय कार्यशाला उचित प्रबंधन के अभाव में औपचारिकता बनकर रह गई। आपदा के दौरान लोगों की जान बचाने के गुर सीखने पहुंचे कुछ जवान कार्यशाला के दूसरे चरण में बैठे-बैठे ही सो गए। कुछ नींद की छपकी लेते रहे।
मंगलवार दोपहर होमगार्ड कार्यालय में शुरु हुई आपदा प्रबंधन की जिलास्तरीय कार्यशाला में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। कार्यशाला में न तो प्रशिक्षित विद्वान आए और न ही अफसर। एडीएम एसएस बघेल के आने की सूचना मिली लेकिन वे भी व्यस्तता के चलते नहीं पहुंच सके। फिर डीईओ आरके उपाध्याय आए और उद्घाटन सत्र का शुभारंभ किया। पहले सत्र में आपदा और प्राकृतिक आपदा प्रबंधन पर डीईओ श्री उपाध्याय, एसएन कॉलेज के प्रो. पी सेल्वराज, रोटरी अध्यक्ष प्रफुल्ल मंडलोई, लायनेस अध्यक्ष सुचित्रा श्राफ, डॉ. वीरेंद्र लाड़, केएल धनगर ने विचार व्यक्त किए। होमगार्ड कार्यालय में एलसीडी टीवी और कम्प्यूटर सिस्टम लगाए गए। तकनीकी खराबी के कारण इस प्रसारित होने वाली सीडी नहीं दिखाई जा सकी। होमगार्ड के डिस्ट्रीक कंमांडेंट जीपी प्रजापति ने भूकंप आपदा प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण के दौरान बचाव के तरीके बताए।
जल्द खुलेगा इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर
जिला होमगार्ड अधिकारी श्री प्रजापति के मुताबिक नए कार्यालय भवन में इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर खोला जाएगा। इसमें 24 घंटे वाहन, आपातकालीन संसाधन के साथ 10 जवान तैनात रहेंगे। सभी विभाग प्रमुखों का समन्वय सेंटर से रहेगा। ताकि आपात स्थिति के समय एकजुटता से निपटा जा सके।
आज पार्षद और निगमकर्मियों को देंगे प्रशिक्षण - बुधवार को कार्यशाला के दूसरे दिन नगर निगम के फायर विभाग, पार्षद और अफसरों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
यह कैसा प्रशिक्षण - जिला स्तरीय आपदा प्रबंधन कार्यशाला के पहले ही दिन ट्रेनिंग लेने वाले बोझिल माहौल में ऊंघने लगे
मंगलवार को आयोजित आपदा प्रबंधन कार्यशाला में एक जवान इस तरह सो गया।
: आपदा प्रबंधन की कार्यशाला में कुछ जवान सो गए थे?
ञ्च पीछे तरफ बैठे कुछ जवान हो सकते हैं। कुछ कह नहीं सकते।
:अतिथि विद्वान क्यो नहीं आए?
ञ्च प्रशिक्षक आए थे। इसमें एक बैंगलुरु से ट्रेनिंग लेकर आई अतिथि विद्वान कल पहुंचेगी।
:आपदा प्रबंधन को लेकर आपके जवान संवेदनशील नजर नहीं आए?
ञ्च जवान तो सभी संवेदनशील है। हमारे लड़के जमीनी स्तर पर बचाव काम करते है।
:कार्यशाला में संख्या कम थी, क्यों?
ञ्च इसमें अधिकतम 50 लोगों को ही शामिल करना है। दूसरे चरण में कुछ लोग जरुरी काम से चले गए थे।
जीपी प्रजापति, डिस्ट्रिक्ट कंमांडेंट
सीधी बात