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खेल-खेल में प्रवचन सुनाने बैठ जाता था कपिल

7 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता - खंडवा
उस समय कपिल की उम्र 8 साल थी। हम और स्कूल के अन्य साथी जब खेलते तो वह धर्म से जुड़ी बातों को इसमें शामिल कर लेते थे। खुद संत की तरह गादी पर और सभी को सामने बैठा लेते। जैन धर्म से जुड़ी बाते सुनाते। इतनी कम उम्र में यह देखकर आश्चर्य होता था। बात आई गई हो जाती लेकिन कपिल का धर्म के प्रति जुड़ाव बढ़ता गया। साल 1993 में पूर्णमति माताजी के शहर में चातुर्मास प्रवास पर आने के दौरान धार्मिक कार्यों में उनकी रुचि और बढ़ती गई। जिसका परिणाम यह निकला कि साल 1997 में उन्होंने ब्रह्मचर्य धारण कर लिया। जैन मुनियों के सान्निध्य में रहकर आज वे उस मुकाम पर पहुंच चुके हैं, जिसकी हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी। दो दिन बाद वे जो प्राप्त करेंगे उसके बाद रिश्तों की लकीर मिट जाएगी। परिवार से उनका भाई, बेटे, काका आदि का संबंध टूट जाएगा। इस बात का दु:ख तो है लेकिन उससे कहीं बढ़कर खुशी की अनुभूति हो रही है कि कपिल ने हमारे कुल का नाम रोशन किया। जो घर में सबसे छोटा था अब वह सबसे बड़ा हो जाएगा।
((जैसा कि कपिल के बड़े भाई आनंद और बहन दीप्ति ने ‘भास्कर’ को बताया))