नागदा के अधिकारियों से तार
भास्कर संवाददाता - नागदा
इटारसी के बीएसएनएल विभाग में हुए लाखों रुपए के घोटाले के तार नागदा से जुड़ गए हैं। मंगलवार को घोटाले की कडिय़ां जोड़ते हुए शहर पहुंची सीबीआई की टीम ने यहां से कई दस्तावेज जब्त किए है। जो फर्जी रूप से तैयार कराए गए थे। बताया जा रहा है कि ठेकेदार मिथिलेश बोयत को तलाशते हुए यहां पहुंची टीम को कुछ महत्वपूर्ण सबूत हाथ लगे है जिसके आधार पर बीएसएनएल के अधिकारियों की मिलीभगत से बीते 6 साल से गोलमाल किए जाने की पुष्टि होती है।
कैसे करते थे गोलमाल
ठेकेदार बोयत बीएसएनएल के डिवीजन ऑफिस में कार्यरत किसी वरिष्ठ अधिकारी का रिश्तेदार बताया जा रहा है। सीबीआई सूत्रों की मानें तो मिथिलेश पहले सी क्लास का ठेकेदार होकर रोड व अन्य निर्माण कार्यों का ठेका लेता था। मगर महत्वपूर्ण पद पर बैठे बीएसएनएल अधिकारी से रिश्तेदारी का पता चलने के बाद मिथिलेश ने बीएसएनएल को केबल व कार्ड सप्लाई करने का ठेका लिया। ठेके के तहत मिथिलेश ने केबल व कार्ड सप्लाई करने की बजाए अधिकारियों से मिलीभगत करके पुरानी केबल व कार्ड को ही सप्लाई करना दर्शा कर लाखों रुपए का भुगतान आसानी से प्राप्त कर लिया। जानकारी के अनुसार यह गोरखधंधा 2006 से 2009 तक चला। सीबीआई अधिकारियों के अनुसार मिथिलेश फर्जी रूप से बनाई गई 4 फर्मों के दस्तावेजों से उक्त फर्जीवाड़े को अंजाम देता था। यह चार फर्में मारूति इंजीनियरिंग एवं कम्यूनिकेशन, इंद्रा इंटरप्राइजेस, मेसर्स मिथिलेश कुमार बोयत व मेसर्स टेलटेक नागदा है। सीबीआई के हाथ ऐसे भी दस्तावेज लगे है जिसमें एक बार सप्लाई की गई सामग्री के बिलों का भुगतान दो बार मिथिलेश ने प्राप्त किया है। अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर यह भी बताया कि घोटाले के तार होशंगाबाद व हरदा से भी जुड़े हुए हैं।