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श्रमिक ४० फीसदी झुलसा

8 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता - नागदा
ग्रेसिम उद्योग के पॉवर प्लांट-1 में मैंटेनेंस के दौरान शुक्रवार दोपहर ठेका श्रमिक गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे में ३५-४० फीसदी झुलसे श्रमिक के हाथ व मुंह प्रभावित हुए। जनसेवा अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे टी.चौइथराम इंदौर रैफर किया।
उद्योग के मीडिया सेल प्रभारी डॉ. सुरेंद्र मीणा के अनुसार दोपहर 2.30 बजे बंद पड़े बॉयलर को शुरू करने के लिए मैंटेनेंस में श्रमिक जुटे थे। इसी दौरान बॉयलर से जुड़ी स्टीम लाइन की पैकिंग ठीक से सील नहीं होने से ठेका श्रमिक उदयसिंह पिता रामाजी निवासी भीलसुड़ा लाइन में अधिक प्रेशर से लीकेज हुए गरम पानी की चपेट में आ गया। श्रमिक को उचित उपचार के लिए इंदौर भेजा गया। यहां बर्न स्पेशलिस्ट शोभा चिमनिया उसके उपचार में जुटे हैं। डॉक्टर के अनुसार श्रमिक 35 से 40 प्रतिशत झुलसा है। हादसे की सूचना प्रबंधन ने बिरलाग्राम पुलिस व औद्योगिक व स्वास्थ्य सुरक्षा विभाग को दी है।



सुरक्षा के थे पूरे इंतजाम

॥ श्रमिक ने सभी सुरक्षा उपकरण पहन रखे थे। दुर्घटना नीचे से गुजर रही स्टीम लाइन में प्रेशर से गरम पानी छूटने से हुई है। उद्योग में प्रत्येक श्रमिकों को सुरक्षा उपकरण पहनने के बाद ही कार्य पर जाने के निर्देश हैं।’’

डॉ. सुरेंद्र मीणा, प्रभारी, मीडिया सेल, ग्रेसिम उद्योग



जनसेवा की गहन चिकित्सा इकाई में श्रमिक को उपचार के लिए ले जाते।

लापरवाही से हो रहे हादसे

4 दिन के भीतर उद्योग में यह दूसरा हादसा है। 20 जनवरी को स्टेबल फाइबर के गोडाउन में आग और शुक्रवार को बॉयलर सफाई के दौरान हुए हादसे से सुरक्षा में चूक नजर आ रही है। उद्योग सूत्रों के अनुसार श्रमिक सभी सुरक्षा उपकरण पहने था। ऐसे में सवाल है कि स्टीम लाइन से निकले गर्म पानी से उसके हाथ कैसे झुलस गए। स्टीम लाइन ऊंचाई पर है। ऐसे में इसे सील करने के दौरान श्रमिक सीढ़ी लगाकर कार्य रहा था। बताया जा रहा है कि नीचे की लाइन से प्रेशर से छूटे गरम पानी की चपेट में श्रमिक आया। ऐसे में यह समझ से परे है कि श्रमिक ने मास्क क्यों नहीं लगा रखा था। ग्रेसिम क्रांतिकारी यूनियन के महामंत्री भवानीसिंह शेखावत के अनुसार दक्ष श्रमिकों की बजाए ठेका श्रमिकों से तकनीकी वाला जोखिमभरा कार्य लिया रहा है। इस तरह के कार्य कुशल श्रमिकों से कराए जाने का नियम है। मगर स्थाई श्रमिकों को वीआरएस के बाद कुशल श्रमिकों की संख्या में कमी आ गई है। इस कारण ठेका श्रमिकों से खतरनाक कार्य तो कराए जा रहे, मगर उन्हें पर्याप्त सुरक्षा संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जाते। शेखावत ने यूनिट हेड सिद्धार्थ बनर्जी को सुरक्षा के मापदंडों के खुलेआम हो रहे उल्लंघन के लिए जिम्मेदार ठहराया है।