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पेयजल की पाइप लाइन से औद्योगिक क्षेत्र में जलापूर्ति
भास्कर संवाददाता - नागदा
चंबल के डाउन स्ट्रीम में बसे 14 गांवों में शुद्ध पेयजल के लिए निर्मित 18 करोड़ रुपए की योजना का लाभ भगतपुरी औद्योगिक क्षेत्र को भी मिलेगा। यह खुलासा विधायक दिलीपसिंह शेखावत ने भास्कर से विशेष चर्चा में किया है। उन्होंने कहा कि वर्षों से चंबल के डाउन स्ट्रीम में औद्योगिक प्रदूषण का रसायन युक्त पानी बहने से संबंधित गांवों का भूजल स्तर प्रदूषित हो चुका है। इससे ग्रामीण पेयजल के लिए मशक्कत कर रहे है। इस समस्या के निदान के लिए शासन ने पीएचई के माध्यम से 18 करोड़ रुपए की पेयजल योजना तैयार की है। जिसके तहत चंबल से डाउन स्ट्रीम के 14 गावों तक पाइपलाइन बिछाई जाएगी। शुद्ध पेयजल के लिए योजना के तहत इंटकवेल व फिल्टर प्लांट का निर्माण भी कराया जाएगा। योजना को मूर्तरूप देने के लिए अभी सर्वे का कार्य कराया जा रहा है।
इसलिए औद्योगिक क्षेत्र को किया शामिल- शेखावत ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने की कड़ी में बिजली के लिए ग्रिड व सड़क के लिए 6 करोड़ रुपए 50 लाख रुपए की राशि स्वीकृत हो चुकी है। जिसके टेंडर जारी किए जा चुके है। ऐसे में क्षेत्र के विकास के लिए पानी की व्यवस्था की जाना थी। जिसे लेकर लघु उद्योग भारती का एक प्रतिनिधि मंडल मोती सिंह शेखावत के नेतृत्व में उनसे मिला था। उनके द्वारा उक्त योजना से क्षेत्र को जोडऩे को सुझाव दिया था। जिसके तहत पीएचई अधिकारियों से चर्चा कर योजना के सर्वे में औद्योगिक क्षेत्र को भी इसी पाइपलाइन से जलापूर्ति करने के निर्देश दिए है। जिसका परीक्षण कराया जा रहा है।
यह गांव है प्रभावित
गौरतलब है कि वर्तमान में औद्योगिक प्रदूषण के कारण चंबल के डाउन स्ट्रीम में बह रहा पानी पूरी तरह से रसायन युक्त हो चुका है। जिसके कारण इस क्षेत्र में स्थित ग्राम परमारखेड़ी, किलोडिय़ा, रजला, गिदगढ़, अटलावदा, बेरछा, खजूरिया, जूना नागदा सहित कुल 14 ग्राम दूषित पानी का सेवन कर रहे है। जिससे ग्रामीणों में गंभीर बीमारियां फैल रही है। हाल ही में परमारखेड़ी की 800 की आबादी में 50 से अधिक विकलांग सामने भी आ चुके है। यहां फ्लोरोसिस की बीमारी अधिक है। जो दूषित भूजल स्तर का परिणाम है। हालात यह है कि इन गांवों के हैंडपंप के पानी में अधिक मात्रा में फ्लोराइड होने से हैंडपंपों का पानी पेयजल के रूप में उपयोग करने पर पाबंदी भी लगाई गई है। ऐसे में उक्त योजना के मूर्तरूप लेने से ग्रामीणों को राहत मिलेगी।