पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • बिजली कंपनी कब्जा छोड़े, कार्यालय देगी रोकस

बिजली कंपनी कब्जा छोड़े, कार्यालय देगी रोकस

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
भास्कर संवाददाता - नागदा
जवाहर मार्ग स्थित स्वास्थ्य विभाग के हक की बेशकीमती जमीन से बिजली कंपनी के अवैध अतिक्रमण को हटाने का रास्ता निकल आया है। चार दिन पूर्व सर्किट हाऊस में आयोजित रोगी कल्याण समिति की बैठक में सरकारी अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर विशाल कंसोटिया ने यह उक्त मुद्दे को उठाया था।
जिस पर समिति अध्यक्ष विधायक दिलीपसिंह शेखावत ने बीच के रास्ता सुझाकर समस्या का हल ढूंढा है। शेखावत के मुताबिक बीते ४७ वर्षों से जमीन पर कब्जा जमाए बैठे बिजली कंपनी कब्जा छोड़े तो रोकस उन्हें उक्त जमीन पर दुकानों का निर्माण कराकर निचले तल पर १० बाय १० का कमरा व ऊपर कार्यालय बनाकर किराए से दे सकता है। बशर्ते कंपनी पहले जमीन से अवैध कब्जा छोड़े।
जरूरी है मुक्त कराना- स्वास्थ्य विभाग द्वारा सरकारी अस्पताल के विस्तार के लिए जिस जमीन पर बिजली कंपनी ने अतिक्रमण कर रखा है। उस जमीन का वर्तमान बाजार मूल्य १ करोड़ रुपए है। ऐसे में अगर जमीन मुक्त कराकर रोकस यहां दुकानों का निर्माण कराए तो उसे ५० लाख की आय हो सकती है। जिससे अस्पताल में कई चिकित्सा उपकरण खरीदें जा सकते हैं।



इनका कहना

॥जवाहर मार्ग स्थित कंपनी का अस्थाई कार्यालय उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए है। यह जमीन स्वास्थ्य विभाग की है।’’

अभिषेक रंजन, सहायक यंत्री विद्युत वितरण कंपनी

॥ हमारी जमीन पर बिजली कंपनी ने वर्षों से अतिक्रमण कर रखा है। कई बार नोटिस दिया। मगर अतिक्रमण नहीं हटाया। रोकस की बैठक में समिति अध्यक्ष ने जो समाधान निकाला है। उसे कंपनी के समक्ष रखा जाएगा।’’

डॉ.विशाल कंसोटिया, मेडिकल ऑफिसर, सरकारी अस्पताल, नागदा

॥ बैठक में जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए बीच का रास्ता निकाला है। अगर कंपनी अधिकारी तैयार होते है तो उन्हें दुकानों का निर्माण कराकर ऊपर मंजिली पर कार्यालय बनाकर किराए से दिया जाएगा। इससे उपभोक्ता को असुविधा भी नहीं होगी। कंपनी नहीं मानी तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।’’

दिलीपसिंह शेखावत, विधायक, नागदा-खाचरौद

विद्युत वितरण कंपनी द्वारा किया गया अतिक्रमण।

क्या है मामला

जवाहर मार्ग पर पूर्व में किराए के मकान में बिजली कंपनी कार्यालय का संचालन करती थी। यहां बिजली संबंधी शिकायतों के साथ ही बिल भरने की सुविधा भी उपभोक्ताओं को मिलती थी। इसी कार्यालय के सामने सरकारी अस्पताल के हक की खाली जमीन पर कंपनी ने कुछ सामान रखकर कब्जा कर लिया। अस्पताल प्रबंधन द्वारा आपत्ति नहीं लेने पर बीते चार दशक में धीरे-धीरे अवैध कब्जे का दायरा बढ़ता गया। इसी दौरान किराए पर लिया गया कार्यालय कंपनी को खाली करना पड़ा। यह कार्यालय शहर से बाहर बसंत पैलेस ग्रिड के पास स्थानांतरित हुआ। इससे कार्यालय उपभोक्ताओं की सुविधा के दृष्टिगत अवैध कब्जे वाले स्थल पर ही कंपनी ने बिल भरना व शिकायतें लेना शुरू कर दिया। अब जब भी रोकस की बैठक में जमीन पर से अतिक्रमण हटाने का मामला उठता है। बिजली कंपनी उपभोक्ताओं की सुविधा का बहाना बनाकर बच निकलती है।