एफडी तोडऩे पर गुस्साए व्यापारी
भास्कर संवाददाता - नागदा
नियम विरुद्ध एफडी तोडऩे पर कृषि उपज मंडी के व्यापारी मंगलवार को आक्रोशित हो गए और उन्होंने खरीदी करना बंद कर दी। उन्होंने कृषि उपज मंडी सचिव पर नियम विरुद्ध व बिना सूचना के एफडी तोडऩे का आरोप लगाया। मंडी बंद होने से सुबह से आए हुए किसानों को भी परेशान होना पड़ा। दोपहर बाद कृषि उपज मंडी उपसंचालक वशिष्ठ द्वारा कार्रवाई का आश्वासन देने के बाद व्यापारियों का गुस्सा शांत हुआ और उपज खरीदी का कार्य शुरू हुआ।
यह है नियम
व्यापारी प्रतिनिधि राधेश्याम पोरवाल ने बताया कि व्यापारी एसोसिएशन की एफडी किसानों के लिए होती है न कि मंडी टैक्स चुकाने के लिए। कोई व्यापारी किसानों की राशि नहीं दे पा रहा है या फिर किसानों की उपज की राशि दिए ही कहीं चला जाता है तो ऐसी स्थिति में इस एफडी से किसानों की राशि चुकाई जाती है। नियम के मुताबिक व्यापारी पर मंडी टैक्स बकाया होने की स्थिति में मंडी प्रशासन संबंधित व्यापारी को डिफाल्टर मानते हुए पहले उसकी खरीदी पर रोक लगाता है, फिर गोदाम व अनाज को सील करता है और व्यापारी की एफडी से राशि लेता है। लेकिन यहां मंडी प्रशासन ने न तो व्यापारी को डिफाल्टर घोषित किया है और नहीं कोई अन्य कार्रवाई। सीधे ही व्यापारी एसोसिएशन की एफडी से राशि निकाल ली गई है, जो गलत है।
हंगामा होने पर पहुंची पुलिस- व्यापारियों के आक्रोशित होने व मंडी प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने के बाद यहां विवाद की स्थिति न बने, इसके लिए मंडी पुलिस भी पहुंची। मंडी अध्यक्ष हरिसिंह गुर्जर ने मामले की जानकारी मंडी उपसंचालक को दी और उनके आश्वासन के बाद मामला शांत हुआ।
आखिर कौन बोल रहा है झूठ
मामले में मंडी सचिव रविंद्र सिंह का कहना था कि मंडी बोर्ड भोपाल में फाइल लगी है, लेकिन स्थगन नहीं मिला है। मंडी बोर्ड समिति के निर्णय का पालन करते हुए ही व्यापारी एसोसिएशन की एफडी से राशि निकाली गई है, जिसकी प्रोसिडिंग भी लिखी गई है। वहीं मंडी बोर्ड समिति अध्यक्ष हरिसिंह गुर्जर का कहना था कि संबंधित व्यापारी को राशि जमा करने के लिए समय दिया गया था। मामला मंडी बोर्ड भोपाल जाने के बाद वहां के निर्णय पर कार्रवाई करने की बात कहीं गई थी। व्यापारी एसोसिएशन की एफडी से राशि लेने का कोई निर्णय नहीं लिया गया था। अब यह समझ से परे है कि सचिव व अध्यक्ष में से झूठ कौन बोल रहा है।
मामला एक नजर में
कृषि मंडी में मदन मोहन इंटरप्राइजेस फर्म पर मंडी टैक्स का करीब 1 लाख 62 हजार 524 रुपए बकाया था। फर्म संचालक राधेश्याम द्वारा बकाया राशि में से 9 जनवरी को 80 हजार रुपए जमा कर दिए गए थे। साथ ही उसे 20 जनवरी तक शेष राशि जमा करने का समय मंडी बोर्ड समिति द्वारा दिया गया था। इसी दौरान यह मामला मंडी बोर्ड भोपाल पहुंचा और मामले की सुनवाई के लिए 22 जनवरी दी गई। लेकिन मंडी बोर्ड भोपाल ने 22 की जगह 29 जनवरी सुनवाई के लिए रखी दी। मंडी बोर्ड भोपाल ने सुनवाई के बाद कार्रवाई करने की बात कहीं थी। मंडी सचिव रविंद्र सिंह ने सुनवाई के पहले ही 23 जनवरी को व्यापारी एसोसिएशन की करीब 5 लाख की एफडी तोड़कर 80 हजार रुपए टैक्स के जमा कर लिए गए और शेष राशि की पुन: एफडी करवा दी गई। इसकी सूचना भी व्यापारी एसोसिएशन को गणतंत्र दिवस के बाद लगी, जिस पर व्यापारियों ने नियम विरुद्ध एफडी तोडऩे पर आक्रोश जताकर सचिव से जवाब मांगा और मंडी बंद कर दी।
मंडी सचिव श्री सिंह व बैठक कर जवाब मांगते व्यापारी एसोसिएशन।
फोटो- प्रदीप व्यास