सरपंच ने २३ आवेदन किए खारिज
भास्कर संवाददाता - नागदा
गणतंत्र दिवस के अवसर पर सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम सभा का आयोजन किया जाता है, जिसमें ग्राम से जुड़ी समस्याओं सहित विभिन्न योजना के आवेदन लेकर लोगों को उसका लाभ दिलवाया जाता है। लेकिन कई ग्राम पंचायतों में ग्राम सभा नाम मात्र के लिए ही होती है। ऐसे ही ग्राम पंचायत नावटिया में ग्राम सभा का आयोजन नाममात्र के लिए हुआ। यहां लोगों से हस्ताक्षर करवाकर ही ग्रामसभा की इतिश्री कर ली गई। जब ग्रामीणों ने सरपंच व सचिव को मुख्यमंत्री आवास योजना के आवेदन दिए तो उन्होंने लेने से साफ इंकार कर दिया। मामले में ग्रामीणों ने एसडीएम से शिकायत की है और पूर्व में बकाया राशि होने की शिकायत पर भी कार्रवाई की मांग की है।
ग्राम पंचायत नावटिया के ग्रामीण लक्ष्मण, नरसिंह, रमेश ने बताया कि ग्राम सभा में २३ लोगों ने मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना के लिए आवेदन दिए थे। लेकिन सरपंच दौलतराम व सचिव द्वारा आवेदन लेने से मना कर दिया गया।
गांव के लोगों को वर्ष २०११-१२ से ही हितग्राही मूलक योजना का लाभ नहीं दिया गया। जबकि जिले से इंदिरा आवास के ३ लक्ष्य प्रति ग्राम पंचायत को मिलते है, उसमें भी सरपंच द्वारा प्रतीक्षा सूची से हटकर अन्य लोगों को लाभ दे दिया जाता है। २६ व २७ जनवरी को हुई ग्राम सभा में भी बिना ठहराव प्रस्ताव के लोगों से हस्ताक्षर करवा लिए गए। ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में १३ जनवरी २०१२ को भी सरपंच की शिकायत की गई थी। जिसमें बकाया राशि होने के बाद भी नियम विरुद्ध सरपंच पद पर काबिज होने की बात कहीं गई थी। प्रशासन ने मामले में मात्र नोटिस देकर इतिश्री कर ली। जबकि सूक्ष्मता से जांच की जाती तो सरपंच पर धारा ४० की कार्रवाई होती।
पूर्व में भी हुई थी सरपंच पर धारा ४० की कार्रवाई
ग्राम पंचायत नावटिया सरपंच दौलतराम चंद्रवंशी के खिलाफ १९ फरवरी १९९६ में गणपत पिता लक्ष्मण व अन्य ग्रामवासियों द्वारा उनकी जमीन छीनने का आरोप लगाते हुए एसडीएम खाचरौद व कलेक्टर से शिकायत की थी। जिसकी जांच में शिकायतें सही पाने जाने पर तत्कालीन एसडीएम ने १७ अगस्त १९९८ को आदेश पारित करते हुए ग्राम पंचायत नावटिया सरपंच दौलतराम को पंचायत अधिनियम की धारा ४० के तहत पद से हटा दिया था।
वसूली बकाया, फिर भी सरपंच
मप्र पंचायतराज व ग्राम स्वराज अधिनियम १९९३ की धारा ३६ के तहत जिस व्यक्ति ने पंचायत की वसूली योग्य राशि पंचायत को अदा नहीं की हो, ऐसा व्यक्ति पंचायत के किसी भी पद के लिए अपात्र होता है। वर्ष १९९८ में दौलतराम को पद से हटाया गया, उस समय जवाहर रोजगार योजना व पंचायत निधि की नगद सिल्क के करीब १९ हजार ८३६ रुपए बकाया थे। जिस पर तत्कालीन जनपद पंचायत सीईओ के पत्र पर तत्कालीन एसडीएम ने १७ जुलाई २००० को तत्कालीन तहसीलदार को उक्त राशि वसूल करने के लिए आदेश दिए थे। लेकिन अभी तक यह राशि सरपंच ने जमा नहीं कराई है। वहीं वर्ष २०१० में हुए ग्राम पंचायत चुनाव में दौलतराम ने चुनाव लड़ा और जीत दर्ज कर सरपंच का पद भी दोबारा ग्रहण किया है। जबकि दौलतराम उक्त चुनाव में बकाया राशि होने से अपात्र हो रहा था।
नियमानुसार होगी जांच
॥ मामले की शिकायत मिली है। जनपद पंचायत सीईओ को रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा है। शिकायत की जांच करवाकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।’’
डॉ. रजनीश श्रीवास्तव, एसडीएम नागदा