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किसानों की कीमती जमीन कौडिय़ों के भाव खरीद ली

7 वर्ष पहले
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अटल तिवारी - शाजापुर
नेशनल हाईवे-3 को फोरलेन बनाने एबी रोड से लगी हुई दोनों तरफ की शाजापुर जिले के सुनेरा सहित आसपास के गांवों के किसानों की कीमती जमीन को कौडिय़ों के भाव पर खरीद लिया गया है। अफसरों की मनमानी देखिए कि अंग्रेजों से भी आगे निकल गए। पुराने अफसरों ने जो मन में आया वह किया, मौका मुआयना किए बिना सर्वे कर लिया। अब किसान कीमत चुका रहे हैं और वर्तमान अफसर दोषियों पर कार्रवाई या सुधार करने की जगह किसानों को सलाह दे रहे हैं कि जो मिल रहा है ले लो और न्यायालय का दरवाजा खटखटाओ। इधर तानाशाही देखिए कि किसानों को उनकी जमीन का भुगतान तक नहीं किया और सरकारी रिकॉर्ड से उनके नाम तक काट दिए।
किसानों की सिंचित जमीन जिसका बाजार भाव 80 लाख से 1 करोड़ रुपए प्रति हेक्टेयर है उसका सरकारी दाम 23 लाख 12 हजार है। अफसरों ने मनमानी ऐसी चलाई कि बाजार भाव तो दूर सरकारी भाव तक नहीं दिया। सिंचित जमीन को असिंचित बता दिया और आधा ही भुगतान किया। असिंचित का सरकारी भाव 11 लाख 56 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर है। जमीन पर लगे संतरे और आम के बगीचों तक को निरंक लिख दिया, जो आज भी लहलहा रहे हैं। रिपोर्ट में लिखते हैं कि उद्यानिकी अफसर, वन विभाग, लोक निर्माण के विशेषज्ञों से मूल्यांकन कराया गया है।
किसानों के साथ हुआ धोखा
सुनेरा के जयप्रकाश धाकड़ कहते हैं कि उनके पिता केशरसिंह धाकड़ के नाम पर दर्ज 4 बीघा सिंचित जमीन का अधिग्रहण किया गया है। अफसरों ने इसे असिंचित लिख दिया। खेत में आम, संतरे, नीबू, मौसंबी के बगीचे को ही कागजों से गायब कर दिया। इनके अलावा नीम, इमली के इमारती पेड़ भी हैं लेकिन मुआवजा एक का भी नहीं दे रहे। गांव के मदनलाल सहित अन्य को कुएं का मुआवजा दे रहे हैं लेकिन जमीन को सिंचित नहीं माना। इसी तरह हरिसिंह, राधेश्याम, महेश कुमार की सवा चार बीघा सिंचित जमीन को असिंचित लिख दिया। इसी तरह अभयपुर के किसान राधेश्याम, दिनेशचंद्र, हरिनारायण के साथ हुआ। इनकी सिंचित जमीन को असिंचित बता दिया। ऐसा किसी एक किसान के साथ न होकर दर्जनों किसानों के साथ हुआ है। अफसर सुनने को तैयार नहीं हैं और किसानों को सलाह दे रहे हैं कि न्यायालय का दरवाजा खटखटाओ। एसडीएम लक्ष्मी गामड़ का कहना है कि किसानों का जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई करने के लिए फिर से प्रकरण बनाए जाएंगे। इसके लिए किसानों को प्रकरण लगाना होगा।
आपत्ति लगाई लेकिन रिकॉर्ड से गायब कर दिया
आशुतोष गोठवाल बताते हैं कि उन्होंने 29 अक्टूबर 2011 को जावक क्रमांक 680 पर आपत्ति लगाई लेकिन भू-अर्जन अधिकारी कार्यालय में इसका कोई रिकॉर्ड ही नहीं है। ग्रामीण बताते हैं कि हाल ही में 21 जनवरी-2014 को हाईवे के अधिग्रहण के लिए तराना एसडीएम ने सार्वजनिक सूचना का प्रकाशन किया। शाजापुर के मामले में सार्वजनिक सूचना प्रकाशन नहीं हुआ। अकेले सुनेरा के अलग-अलग नंबर मिलाकर 118 सर्वे नंबरों से 70 किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया है।




किसानों की समस्या जायजा

॥सिंचित जमीन को असिंचित के प्रकरण बनाना और पेड़-पौधों के बगीचों को सर्वे में शामिल नहीं करना बड़ी चूक है। मौका मुआयना किए बिना और सर्वे किए बगैर प्रकरण बनाने वाले दोषी पटवारियों और अधिकारियों पर कार्रवाई के प्रकरण बनाए जाएंगे।ञ्जञ्ज

डॉ. प्रमोद गुप्ता, कलेक्टर

कर्नल गोपीकृष्ण गोठवाल

इस सिंचित जमीन को असिंचित बता दिया और बगीचे का कोई मुआवजा नहीं।

क्षतिपूर्ति को सरकार कहती है पुरस्कार

रिटायर ले. कर्नल गोपीकृष्ण गोठवाल कहते हैं कि यह तो जमीन की क्षतिपूर्ति तक नहीं है और अफसर इसको अवार्ड ((पुरस्कार)) देना कहते हैं। आज भी अंग्रेजों की भाषा बोल रहे हैं। सरासर बेईमानी कर रहे हैं डायवर्टेड भूमि को सिंचित से भी दोगुना मुआवजा देने की जगह उसे पड़त बता दिया। गांव भर के किसानों की सिंचित जमीन को असिंचित बता दिया। अब कहते हैं न्यायालय में जाओ। गलती अफसरों ने की है तो उन पर कार्रवाई क्यों नहीं करते। किसान के साथ पहले अन्याय हुआ और अब कोर्ट-कचहरी के चक्कर भी लगाएं और वकीलों को मोटी फीस कहां से दें।



एनएच-3 का होना है फोरलेन।

नेशनल हाईवे-3 को फोरलेन बनाने एबी रोड से लगी जमीन का मामला