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हत्या का प्रयास के आरोपी को सात साल की सजा

8 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता-!- दमोह
जिला एवं सत्र न्यायाधीश बीके श्रीवास्तव ने हत्या के प्रयास के आरोपी को सात साल की सजा एवं जुर्माने से दंडित किया है।
अभियोजन के मुताबिक देहात थाना क्षेत्र के बिजौरी गांव में 3 अपै्रल 2010 को प्रकाश पिता तांतू आदिवासी ((37)) ने गंाव के चूरामन के साथ लाठियों से मारपीट कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। घायल को गंभीर हालत में इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। घायल ने पुलिस को दिए बयानों में बताया था कि आरोपी प्रकाश शराब के नशे में उनके रिश्तेदारों को आए दिन परेशान और गाली गलौज कर रहा था। जिसका विरोध करने पर उसने मारपीट कर उसे मरणासन्न कर दिया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर चालान कोर्ट में पेश किया। न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ दर्ज धारा 307 में दोष सिद्ध पाए जाने पर 7 साल की सजा तथा पांच हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया है। अभियोजन पक्ष की ओर पैरवी शासकीय लोक अभियोजक मुकेश जैन ने की।



आध्यात्म चेतना वर्तमान समय की मांग : मुनिश्री

अभाना-!-आज मानव भौतिकता की चकाचौंध में अपने स्वरूप को भूलकर पंच इंद्रियों के विषयों में रच रहा है। जिससे भ्रमित हो इन्हीं में सुख की चाहकर दुखी हो रहा है। सच्चा सुख तो हमारी आत्मा में हैं। यह वचन गणाचार्य विराग सागर महाराज के शिष्य चैतन्य चमत्कारी षटरस त्यागी मुनिश्री विश्वयश सागर महाराज ने जैन धर्मशाला के प्रांगण में मंगल देशना देते हुए कहे। उन्होंने आगे बताया कि बिना सम्यकज्ञान के कारण यह मानव आत्मा क्या है शरीर क्या है। चौरासी लाख योनियों में भटक जन्म मरण के दुख उठा रहा है। इसलिए आध्यात्म चेतना वर्तमान समय की मांग है। इस अवसर पर संघस्थ ऐलक श्री अपराजित सागर जी महाराज ने मंगल देशना एक मुक्तक के माध्यम से दी। इस दौरान बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी जनों की मौजूदगी रही।