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45 मिनट में एक लाख स्वयंसेवकों का भोजन!

8 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता -!- जबलपुर
शिविर के समाप्त होते हुए अब टेंट को समेटने का काम जोरों पर है। एक सप्ताह के अंदर शिविर स्थल को पूर्व की स्थिति में बना दिया जाएगा। इतने बड़े आयोजन के दौरान व्यवस्थाएं देने के मामले में शिविर ने मिसाल कायम की है। संकल्प महाशिविर में स्वयंसेवकों के भोजन के लिए आठ किचन बनाए गए थे, इसके साथ ही एक सेन्ट्रल किचन भी बनाया गया था, जो आठ किचनों को कन्ट्रोल करने का काम करता था। जिस किचन में भोजन कम अथवा ज्यादा होता, उसका आदानप्रदान तुरंत वाहन से कर दिया जाता था।
स्वयंसेवकों के चाय, नाश्ता और भोजन के लिए आठ पंडाल लगाए गए थे। प्रत्येक पंडाल में 10 हजार स्वयंसेवकों के एक साथ भोजन करने की व्यवस्था थी। भोजन बनाने में गुजरात एवं शहर के कर्मचारी शामिल थे। प्रत्येक पंडाल में एक हजार स्वयंसेवकों को भोजन परोसने के लिए भी लगाया था। स्वयंसेवकों के भोजन करने की पूरी प्रक्रिया लगभग 45 मिनट में पूरी कर ली जाती थी। हालांकि शिविर में एक लाख स्वयंसेवकों के पहुंचने का अनुमान था, परंतु शिविर में पहुंचे स्वयंसेवकों की संया 50 से 60 हजार बताई जा रही है।
67 लाख गैलन से अधिक पानी की खपत
महाशिविर में पहुंचे स्वयंसेवकों के लिए पानी सह्रश्वलाई की व्यवस्था नगर निगम एवं जेडीए द्वारा की गई थी। शिविर के दौरान लगभग 67 लाा 50 हजार गैलन से अधिक पानी खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। पानी की सह्रश्वलाई के लिए 5 टैंकर नगर निगम, 5 टैंकर हाइटेंड टैंकर, 2 जेडीए के पप, एक किसान
का पप तथा रामेश्वरा् कॉलोनी की टंकी से पानी सह्रश्वलाई की व्यवस्था की गई थी।
दान में ली खाद्य सामग्री
संकल्प महाशिविर के लिए गेहूं, चावल, दाल, गुड़ एवं दूध
स्वयंसेवकों द्वारा दान में दी गई। बताया जाता है कि गेहंू जबलपुर से, चावल बालाघाट और छिंदवाड़ा से, गुड़ करेली और मण्डला से तथा दाल गाडरवारा एवं नरसिंहपुर से लाई गई थी। मोबाइल नेटवर्क के लिए अस्थाई टॉवरसं कल्प महाशिविर के दौरान स्वयंसेवकों की उपस्थिति को देखते हुए मोबाइल में नेटवर्क की समस्या आने की संभावना थी। इस समस्या से निजात पाने के लिए शिविर स्थल पर अस्थाई मोबाइल टॉवर भी लगाए गए थे।



शिविर स्थल पर सन्नाटा

संकल्प शिविर में तीन दिन तक चहल-पहल के बाद आज सन्नाटा छाया रहा। शिविर के चलते आयोजन स्थल पर स्वयंसेवकों की उपस्थिति से उत्साह का वातावरण बना हुआ था, परंतु शिविर के समाप्त होते ही टेंट खाली पड़े हैं। वहां पूरी तरह सन्नाटा छाया हुआ है। केवल व्यवस्थाओं में लगे लोग ही नजर आ रहे हैं।

भारी मात्रा में बची खाद्य सामग्री

संकल्प शिविर में जुटाई गई खाद्य सामग्री भारी मात्रा में बच गई है। सामग्री को देखकर ऐसा लगता है कि अभी एक और शिविर आयोजित किया जा सकता है। बताया जाता है कि जो सामग्री खरीदी एवं दान में ली गई थी, उसे वापस किया जाएगा।

विद्युत सप्लाई की व्यवस्था

महाशिविर स्थल पर विद्युत सप्लाई की व्यवस्था की अलग से फीडर लगाया गया। यहां के फीडर अन्य फीडरों से जोड़ा गया था, ताकि आपात स्थिति में दूसरे फीडरों से बिजली सप्लाई की जा सके ।