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बिना लाइट और नंबर की ट्रॉलियों से हो रही ढुलाई
भास्कर संवाददाता - दमोह
शहर में इन दिनों खेती-किसानी में काम आने वाली ट्रॉलियां खतरनाक ढंग से व्यावसायिक ढ़ुलाई कर रही हैं। सबसे ज्यादा खतरा बिना लाइट की ट्रॉलियों से बाहर लटकते लोहे के सरियों से बना हुआ है। ट्रॉली से आधे बाहर लटके सरिए हादसे का खतरा कई गुना बढ़ा रहे हैं। भास्कर ने शहर से गुजरने वाले ऐसे लोडिंग वाहनों की पड़ताल की तो पाया लगेज वाहन और ट्रॉलियों में निर्माण सामग्री विशेषकर लोहे की छड़ों और गाटर सहित गिट्टी की ढुलाई के समय सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। ट्राॅिलयों के पीछे न तो नंबर हैं और न ही लाइट। रात में चमकने वाले स्टीकर तक ट्रॉलियों पर देखने को नहीं मिले। वहीं दिन में भी ट्रॉलियों में लोहे की छड़ें लादने के बाद उसमें कोई संकेतक नहीं लगाया जाते हैं।
किल्लाई नाका से बस स्टैंड चौक और स्टेशन चौराहा से तीनगुल्ली चौराहा दो ऐसे मार्ग हैं, जो सर्वाधिक व्यस्त रहते हैं। जिला अस्पताल, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन के लिए जाने लोगों को इन्हीं चौराहों से होकर गुजरना पड़ता है। यहां से बस, ऑटो, बाइक व पैदल यात्रियों का आना-जाना लगा रहता है। यातायात की द्रष्टि से बेहद संवेदनशली इस मार्ग में लोडिंग वाहन लापरवाही से सामान ढोते देखे जा सकते हैं। बस स्टैंड से किल्लाई नाका जाने वाले मार्ग पर खड़े सरियों से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली से भिड़ते हुए कई वाहन बचे। जबलपुर की ओर जा रही यात्री बस के अगले हिस्से में ट्रॉली में लोड रॉड घुस गई। हालांकि कोई हादसा नहीं हुआ। लेकिन यदि इस हादसे की चपेट में कोई यात्री आ जाता तो बड़ी घटना होती। स्टेशन चौराहा से तीन गुल्ली जाने वाले मार्ग पर भी यही स्थिति रहती है। इन मार्गों पर आयरन मटेरियल की बड़ी दुकानें हैं। हर दिन बड़ी संख्या में ट्रैक्टर से लेकर हाथ ठेला यहां लोहे के एंगल, छड़े और गाटर आदि लेने आते हैं। इन स्थानों से बेहद असुरक्षित तरीके से यह खरतनाक सामग्री ले जाई जाती है। पिछले साल ही एक राहगीर पर टंडन बगीचा के पास से गुजरते समय लोह का सरिया सिर पर गिर गया था, जिससे वह घायल हो गया था। ऐसी कई घटनाएं हो चुकी है।
एडवोकेट नितिन मिश्रा का कहना है कि शहर के यातायात के लिए खेती-किसानी के लिए उपयोग होने वाली ट्रॉलियों में असुरक्षित ढंग से माल की ढलाई खतरनाक है। व्यवसाई सुरेश पटेल का कहना है कि हर दिन ट्रॉलियों से हादसे हो रहे हैं। कोई न कोई वाहन सड़क पर आकर भिड़ जाता है। समाजसेवी अजयदीप श्रीवास्तव का कहना शहर की बिगड़ी हुई यातायात व्यवस्था को सुधारना बेहद जरूरी है। जिन मार्गों पर लोहे की छड़ें, सरिया और एंगल लोड होते हैं उन मार्गों से स्कूली बच्चे, कालेज छात्र-छात्राएं, महिलाएं और आम जनता का दिनभर आना-जाना लगा रहता है। कई-कई बार दिन में जाम लगता है। इसलिए समस्या का स्थाई समाधान होना चाहिए।
जुर्माना भरकर छूट जाते हैं
॥ ट्रैक्टर में लगी ट्रॉलियों का उपयोग कृषि कार्यों के लिए ही करने का प्रावधान है। कुछ लोग इसका व्यावसायिक रजिस्ट्रेशन आरटीओ में करवा लेते हैं, लेकिन रजिस्ट्रेशन के नियमों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता। ऐसी खतरनाक लोडिंग पर ट्रैफिक पुलिस कार्रवाई कर तो ले पर ट्रॉली ऑनर अधिकतम पांच सौ रुपए तक का जुर्माना भरकर छूट जाते हैं। पिछले छह माह में ऐसे सात-आठ केस बनाए हैं। ॥ आरएन सिंह, यातायात प्रभारी