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भक्त की भावना बढ़ी होती है : मुनि प्रयोग सागर

8 वर्ष पहले
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दमोह - मंदिर बड़ा न हो किंतु भक्त की भावना बढ़ी होनी चाहिए। शिखर बड न हो किंतु आस्था और विश्वास का शिखर ऊंचा होना चाहिए। आस्था और विश्वास की दम पर ही राम नाम का पत्थर समुद्र में तेरने लगता है। गांव के लोगों में शहर के विपरीत आस्था और श्रद्धा का खजाना होता है गांव के लोगों के पास धन कम हो सकता है किंतु भावना बहुत बढी होती है भारत की आत्मा गांव में निवास करती है। ये उद्गार मुनि श्री प्रयोग सागर जी महराज ने राजा पटना गांव में आयोजित दो दिवसीय वेदी प्रतिष्ठा समारोह में अपने मंगल प्रवचनो में कहे। इसके पूर्व ब्रम्ह, चक्रेश भैया के निर्देशन में भाग मंडल विधान के प्रारंभ में धार्मिक शुद्धि की क्रियाएं संपन्न की। इस अवसर पर विधान में सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य प्रेमचंद जैन, यज्ञनायक राजेष रज्जू, कुबेर डॉ. रमेशचंद जैन, ईशान खुशालचंद, सानत बाबूलाल, महेंद्र नंदकुमार एवं प्रथम अभिशेक करने का सौभाग्य सुरेंद्र सराफ को प्राप्त हुआ। दमोह से समारोह में अनेक श्रद्धालु बड़ी संख्या में सम्मिलित होने पहुंचे।
समारोह संयोजक महेष बड़कुल, राजेश हिनौती एवं उत्तमचंद को बनाया गया था। समारोह में बड़ी संख्या में ग्रामवासियों भी सम्मलित रहे तथा धार्मिक आयोजन का लाभ किया तथा मुनि श्री के मंगल प्रवचन सुने। वेदी प्रतिष्ठा में प्रमुख रुप से शाकाहार उपासना परिसंघ के सदस्यों के अलावा अभय बनगांव, संतोश वैभव, रुपचंद जैन, कल्लन भैया, संजीव शाकाहारी, नेमचंद बजाज, महेश दिगंबर, गुड्डू भैया, अखिलेश, सलिल लहरी की मौजूदगी रही। समारोह के दौरान परिसंघ के प्रवक्ता सुनील बेजीटेरियन ने जैन समाज को अल्पसंख्यक घोषित किए जाने की घोषणा की जिस पर उपस्थित जन समुदाय ने करतल ध्वनि से जयकारों के साथ स्वागत किया।