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2 साल पहले हुआ था रिनुअल

8 वर्ष पहले
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दरअसल टीकमगढ़-कारी रोड पीडब्ल्यूडी विभाग के लिए भ्रष्टाचार का जरिया बन गई है। करीब 1 साल पहले इसी रोड पर 2 किमी तक रिनुअल कराया गया था। इसका टैंडर ठेकेदार सुनील भायजी के नाम खुला था। उन्होंने 12 लाख रुपए की लागत से 2 किमी तक सड़क के पैंचवर्क किए थे। लेकिन महज एक बारिश में ही पूरी सड़क पहले की तरह खस्ताहाल हो गई है। अब इसी सड़क का पुर्ननिर्माण कराया जा रहा है। पीडब्ल्यूडी विभाग में अक्सर सड़क निर्माण से पहले उसी सड़क पर लाखों रुपए के पेंचवर्क कराए जाते हैं। फिर 1 साल या 6 महीने बाद उसका निर्माण करा दिया जाता है। जिससे पेंचवर्क के नाम पर की गई खानापूर्ति उजागर न हो सके।




नए निर्देशों का पालन नहीं

पीडब्यूडी मंत्रालय ने टिकाऊ सड़कों के निर्माण के लिए करीब एक साल पहले मापदंड में बदलाव किया है। इसमें नई सड़कों के निर्माण की चौड़ाई 7.5 मीटर रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही डामर की परत में भी सुधार कर 7.5 सेमी किया गया है। लेकिन हाल में बनाई जा रही टीकमगढ़-कारी सड़क में नये नियमों का पालन नहीं किया गया है। इस सड़क की चौड़ाई सिर्फ 3 मीटर रखी गई है। सड़क की ऊंचाई में भी सुधार नहीं किया गया है। तय मापदंड के अनुसार 7.5 सेमी डामर की परत भी नहीं डाली जा रही है। नियमों की अनदेखी के कारण ही सड़क निर्माण के साथ ही उखडऩे लगी है। ऐसे में शासन के लाखों रुपए सिर्फ भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहे हैं।



टीकमगढ़। दो साल पहले बनी थी कारी सड़क।

रिजेक्ट की 80 मीटर सड़क

ईई श्री वर्मा ने बताया कि अब तक तीन बार सड़क की जांच की जा चुकी है। सड़क का निर्माण जहां से शुरू हुआ है वहां से करीब 80 मीटर सड़क खराब क्वालिटी की पाई गई है। इसलिए पूरा निर्माण रिजेक्ट कर ठेकेदार से दोबारा सड़क बनाने के निर्देश दिए गए हैं। आगे भी सड़क निर्माण का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं होगा। अगर काम तय मापदंड के अनुसार नहीं हुआ तो सड़क रिजेक्ट कर दी जाएगी। ऐसे में परिणाम ठेकेदार को भुगतना होंगे। सवाल यह है कि सामग्री की क्वालिटी इतनी घटिया है कि सड़क १५ दिन भी नहीं चल पाई है। न तो अधिकारियों ने प्लांट का जायजा लिया है और न ही काम शुरु होने से पहले गुणवत्ता की जांच कराई है। मुख्य सड़क से लगी इस सड़क को जो भी देख रहा है, वह गुणवत्ता पर सवालिया निशान लगा रहा है।



टीकमगढ़। कारी सड़क पर डामर से गिट्टी का साथ छोड़ दिया है।

शिकायत के लिए लामबंद

नगर पंचायत कारी के एक दर्जन लोगों ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मामले की शिकायत विभागीय अधिकारियों और कलेक्टर से करने की बात कही है। कारी के सूर्यप्रकाश खरे ने बताया कि सड़क के निर्माण में डामर की जगह जला ऑयल इस्तेमाल किया जा रहा है। जिससे गिट्टी उखडऩे लगी है। सुरेंद्र राय ने बताया कि एक साल पहले पेंचवर्क किया गया था। लेकिन कमीशन के चलते महज खानापूर्ति की गई। मनोज तिवारी का कहना है कि कई बार आंदोलन करने के बाद सड़क का निर्माण शुरू हुआ है। लेकिन निर्माण की क्वालिटी इतनी घटिया है कि महज एक माह में पूरी सड़क उखड़ जाएगी। गांव वालों ने विभागीय अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। पीडब्ल्यूडी विभाग के ईई किशन वर्मा ने बताया कि टीकमगढ़-कारी की लंबाई 3 किमी है। 55 लाख रुपए की लागत से सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। इसका टैंडर ठेकेदार राकेश दीक्षित के नाम है। सड़क पुराने मापदंड से बनाई जा रही है। इसलिए इसकी चौड़ाई सिर्फ 3 मीटर है। उन्होंने बताया कि सड़क नए सिरे से बनाई जा रही है। डामर से पहले 2 कोड डब्ल्यूबीएम ((कच्ची सड़क)) बनाई गई है। इसके बाद 7.5 सेमी डामर का कोड किया जा रहा है। विभागीय अधिकारी आंकड़े गिनाकर सड़क का निर्माण तय मापदंड के अनुसार बता रहे हैं। लेकिन हकीकत में सड़क उस गुणवत्ता के साथ नहीं बन रही है। करीब 15 दिन पहले सड़क का निर्माण शुरू किया गया है। लेकिन आगे-आगे सड़क का निर्माण हो रहा है और पीछे सड़क उखड़ती जा रही है। नियम अनुसार 7.5 सेमी डामर होना है। लेकिन इसमें भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की जा रही है। खराब मटेरियल और गुणवत्ता के कारण ही सड़क कई जगह से खराब हो गई है। अभी सड़क का निर्माण पूरा भी नहीं हुआ है। लेकिन गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।



भास्कर संवाददाता। टीकमगढ़

एक पखवाड़े पहले ही बनी टीकमगढ़-कारी सड़क की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। अभी सड़क कंपलीट भी नहीं हुई है और डामर ने गिट्टी का साथ छोड़ दिया है। अब सड़क की स्थिति यह है कि गिट्टी अलग दिखाई पड़ रही है और डामर गायब हो गया है। पीडब्ल्यूडी के ईई ने सड़क का निरीक्षण करने के बाद उसके एक हिस्से को निरस्त कर दिया है। साथ ही उसमें सेंपल भी जांच को भेजे हैं। हैरानी की बात यह है कि यह सड़क दो साल पहले ही बनी थी, कुछ ही दिनों में खराब हो गई, दोबारा फिर से सड़क बन रही है, मगर गुणवत्ता एकदम घटिया है। बार-बार सड़क बनने को लेकर अब ग्रामीणों भी आक्रोशित हो गए हैं और उन्होंने घटिया सड़क निर्माण की शिकायत मुख्यमंत्री और कलेक्टर से करने की तैयारी कर ली है।

दरअसल टीकमगढ़ से कारी के बीच 3 किमी सड़क का पुर्ननिर्माण कुछ दिन पहले ही शुरू किया गया है। करीब 1.5 किमी सड़क का निर्माण पूरा हो गया है। लेकिन खराब मटेरियल के कारण निर्माण के साथ ही सड़क उखडऩे लगी है। घटिया निर्माण का हाल यह है कि डामर के साथ डाली गई गिट्टी पूरी सड़क पर फैल गई है। डामर की कम मात्रा के कारण सड़क खस्ताहाल हो गई। जिले की जीर्णशीर्ण सड़कों को सुधारने के लिए करोड़ों रुपए की राशि दी जा रही है। लेकिन सड़कों की गुणवत्ता के साथ लगातार खिलवाड़ होने से जनता के पैसे की बर्बादी हो रही है।



टीकमगढ़-कारी सड़क बनाने में लापरवाही, ईई ने 80 मीटर सड़क रिजेक्ट कर सेंपल जांच के लिए भेजे, दोबारा बनाने के निर्देश



१५ दिन में ही उखडऩे लगी पक्की सड़क