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ईश्वर के प्रेम रस में नहीं डूबे तो जीवन व्यर्थ
भास्कर संवाददाता। टीकमगढ़
बुंदेलखंड दूसरी अयोध्या है। यहां ओरछा में साक्षात श्रीरामराजा सरकार विराजे हैं। गोस्वामी तुलसीदास जब भी चित्रकूट से वृंदावन धाम जाते। वे ओरछा में कुछ दिन जरूर रुके। इसका कई ग्रंथों में प्रमाण है। इस क्षेत्र के भक्त बड़े भाग्यशाली हैं। भक्तिवश यहां श्रीरामराजा सरकार आए और उनकी भक्तिरस में डूबकर गोस्वामी तुलसीदास पधारे। ईश्वर के प्रेमरस में डूबे बिना जीवन का उद्धार संभव नहीं है। यह विचार श्रीहनुमान बगिया मंदिर परिसर में चल रहे गौ भक्ति महोत्सव और श्रीमद् भक्तमाल कथा के सातवें दिन वृंदावन धाम से पधारे मलूकपीठाधीश्वर महंत श्रीराजेंद्रदास जी महाराज ने व्यक्त किए।
उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास जी का भक्ति चरित्र सुनाते हुए कहा कि एक बार गोस्वामी जी की ख्याति सुनकर सम्राट अकबर ने दिल्ली आने का निमंत्रण भेजा। जब गोस्वामी तुलसीदास जी अकबर के दरवार में पहुंचे तो उन्होंने ऊंचा आसन दिया। लेकिन बाद में कोई चमत्कार दिखाने की बात कही। इस पर गोस्वामी जी ने कहा कि हम तो रामनाम का जप करने वाले हैं। हम चमत्कार नहीं जानते। ये काम तो जादूगरों का है। यह बात सुनकर सम्राट अकबर नाराज हो गया और उसनें गोस्वामी जी को कारागार में भेज दिया। उसी रात श्रीहनुमान जी महाराज कारागार में गोस्वामी जी के सामने प्रकट हुए। देखते ही देखते करीब 1 हजार विशालकाय बंदरों ने दिल्ली में हाहाकार मचा दिया। अकबर की बुरी दशा कर डाली। तब अकबर ने तुरंत गोस्वामी जी को छोडऩे का आदेश दिया और अपना मुकुट उनके चरणों में रख दिया। इसके बाद अकबर ने नई दिल्ली में लालकिला बनवाकर पुराने स्थान को छोड़ दिया। पुराने राजदरवार में गोस्वामी जी ने हनुमान जी महाराज की प्रतिमा स्थापित की। जो आज भी पुरानी दिल्ली के किले में स्थापित है।
समापन पर हुआ नगर भंडारा
बुधवार को 7 दिवसीय कथा के समापन पर नगर भंडारे का आयोजन किया गया। अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने लिधौरा पहुंचकर कथा श्रवण की। कई श्रद्धालुओं ने ओरछा स्थित गौशाला के लिए दानराशि भेंट की। महाराज का आर्शीवाद लेने घंटों भक्तों की भीड़ लगी रही। समापन पर बताया गया कि 14 फरवरी से उप्र के ललितपुर में श्रीवाल्मीक रामायण का आयोजन होगा। अंतिम दिन जिले भर से पहुंचे श्रद्धालुओं को आगामी कथा के लिए आमंत्रण दिया गया।
राजेंद्र दास महाराज ने कहा कि ओरछा में श्रीरामराजा सरकार और गोस्वामी तुलसीदास जी के पधारने से धन्य हुआ बुंदेलखंड , सातवें दिन कथा सुनने उमड़े हजारों श्रद्धालु, भंडारे मेंं कराया भोजन ,