मरीज सीरियस आया तो जबलपुर रैफर
भास्कर संवाददाता - दमोह
जिला अस्पताल को प्राइवेट अस्पताल की तर्ज पर सुविधाएं देने के लिए शासन द्वारा करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। जिससे जिला अस्पताल अब नए कलेवर में दिखाई देने लगा है। इससे लोगों की उम्मीदों बढ़ी। ताकि उन्हें गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए जबलपुर या नागपुर नहीं जाना पड़ेगा। लेकिन जिला अस्पताल के विस्तार के साथ यहां खाली पड़े पदों को भरने के लिए कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यदि कोई सीरियस मरीज आ जाए तो उसे विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने के कारण जबलपुर रैफर किया जा रहा है। 300 बिस्तरों वाले जिला अस्पताल में अभी प्रथम श्रेणी डॉक्टरों के 58 पद स्वीकृत हैं। जिनमें से 30 पद खाली हैं। इसके अलावा अस्पताल में द्वितीय एवं तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के करीब 74 पद खाली पड़े हैं। जो कई सालों से भरे ही नहीं गए। गंभीर रोगों के इलाज की सुविधा नहीं है। यदि ग्रामीण क्षेत्र से कोई गंभीर मरीज आ जाता है तो ड्यूटी डॉक्टर उसे तत्काल जबलपुर रैफर कर देते हैं। युवा जाग्रति मंच के जिला संयोजक नितिन मिश्रा का कहना है कि शासन द्वारा अस्पताल का बाहरी स्वरूप तो बदल दिया गया है लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
केवल एक स्त्री रोग विशेषज्ञ
जिला अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ के 4 पद स्वीकृत हैं। जिनमें से इन दिनों केवल एक स्त्री रोग विशेषज्ञ है। इसी तरह शिशु रोग विशेषज्ञ के 7 में से 6 पद खाली हैं। इसी तरह कंपाउंडर व फार्मासिस्ट के सभी आठ पद खाली हैं। 12 वार्डवाय में से 11 पद खाली हैं। संविदा वार्डवाय के 18 में से 6 पद खाली हैं।