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65 साल के रिटायर शिक्षक ने 60 वर्षीय महिला को बनाया जीवन साथी

8 वर्ष पहले
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नीरज सोनी - दमोह
शहर के एसपीएम नगर में रहने वाले एक रिटायर शिक्षक ने 65 साल की उम्र में एक 60 वर्षीय अविवाहित महिला से शादी करके अपना दूसरा दांपत्य जीवन शुरू किया है।
रिटायर शिक्षक पीएन दुबे की पहली पत्नी का निधन करीब डेढ़ साल पहले हो जाने के कारण वे खुद को अकेला महसूस कर रहे थे। एक सामाजिक संस्था के सहयोग से उन्होंने गुरुवार को शहर के एक हनुमान मंदिर पहुंचकर एक-दूसरे को अपना जीवन साथी बना लिया। शहर में यह अनोखी शादी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी है। शहर के एसपीएम नगर निवासी शिक्षक पीएन दुबे ने जबलपुर के अधार ताल निवासी 60 वर्षीय सिद्धि दुबे से पुनर्विवाह किया है। हालांकि सिद्धी दुबे अभी तक अविवाहित थी और पूरी तरह से धार्मिक होने के कारण उन्होंने खुद को ईश्वर की सेवा में समर्पित करके रखा था। गुरुवार को वे दमोह के बहू बनकर आईं और डीईओ आफिस के पास बने संकट मोचन हनुमान मंदिर में अपने पति पीएन दुबे के साथ दूसरा जीवन शुरू करने का संकल्प दोहराया।
इसके पहले जबलपुर में ही सामाजिक संस्था ने इस जोड़े को आपस में मिलवाया था। इस अनोखे विवाह में शामिल होने के लिए श्री दुबे का छोटा बेटा पेशे से साफ्टवेयर इंजीनियर विकास दुबे मुंबई से दमोह आया है। श्री दुबे ने बताया कि उनका बड़ा बेटा संजीव दुबे और बेटियों सहित पूरा परिवार उनके इस निर्णय में साथ रहा है।




राहत संस्था ने कराई दोनों की मुलाकात

शासकीय एमएलबी गल्र्स से अप्रैल 2009 में रिटायर हुए थे। 16 माह पहले उनकी पत्नी निर्मला दुबे का निधन हो गया था। इसके बाद से वे अकेले हो गए थे। दो बेटियों की शादी हो जाने और दोनों बेटों के जॉब में बाहर होने के कारण भाईयों का भरा पूरा परिवार होने के बाद भी श्री दुबे खुद को एकांत महसूस कर रहे थे। श्री दुबे ने बताया कि बेटे और बेटियां उन्हें अपने साथ रहने के लिए कह रहे थे, लेकिन उनका मन और आत्मा दमोह के लोक व सामाजिक जीवन के साथ धर्म व अध्यात्म में रमा था, इसलिए उन्होंने निर्णय लिया कि वे यहीं रहेंगे। श्री दुबे के अनुसार कुछ माह पहले उन्होंने एक अखबार में जबलपुर की ऐसी संस्था का विज्ञापन देखा था जो विधवा, विधुर, विकलांग, निराश्रित जोड़ों को मिलाकर उनकी शादी कराती थी। राहत नाम की संस्था से संपर्क करने के बाद उसके प्रमुख अर्जुन सिंह वैश्य ने उनकी मुलाकात जबलपुर की 60 वर्षीय सिद्धि दुबे से कराई। मुलाकात के बाद लगा कि वे दोनों आगे का जीवन एक साथ सुख-दुख के साथी बनकर गुजार सकते हैं तो शादी करने का निर्णय कर लिया। उन्होंने बताया कि उनकी नई पत्नी धार्मिक विचारों से भरी हैं और ईश्वर की सेवा में अपना जीवन समर्पित करने के कारण ही उन्होंने अपनी शादी नहीं की थी। उनका कहना है कि उम्र की जिस अवस्था में उन्होंने एक-दूसरे को स्वीकार किया है। उसमें सांसारिक सुख और भोग की कहीं भी कोई गुंजाइश नहीं रह गई है। केवल ईश्वर भजन और उपासना के लिए वे साथ मिलकर आगे का पूरा जीवन गुजारेंगे।

दमोह में विवाह करने के बाद मंदिर में दर्शन करने के लिए पहुंचेपीएन दुबे और सिद्धि दुबे।

अनोखी शादी

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