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- ‘नारी को मंगल स्वरूप में हमेशा पूजा जाता है’
‘नारी को मंगल स्वरूप में हमेशा पूजा जाता है’
कार्यालय संवाददाता - बीना
नारी को मंगल स्वरूप में हमेशा पूजा जाता रहा है, समस्त धर्मों के अनुयायी भी नारी को मां का दर्जा देते हैं और उसके महत्व को प्रतिपादित करते हैं। नारी ही है जो तीर्थंकरों को जन्म देने का परम सौभाग्य अर्जित करती है। वह ही महापुरुषों को जन्म देती है, जो संपूर्ण विश्व के कल्याण के लिए मार्ग प्रशस्त करते हैं। यह बात मालथौन में चल रही सिद्ध चक्र महामंडल विधान के दौरान आर्यिका भावना मति माताजी ने कही।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हमारे राष्ट्र में एक नई जीवनशैली को हम सभी ने अख्तियार कर लिया है जो आगे जाकर बहुत घातक हो सकती है। हम दो हमारा एक, का दृष्टिकोण भले ही जनसंख्या वृद्धि को रोकने में कारगर सिद्ध हो, परंतु इसके दूरगामी परिणाम कितने घातक सिद्ध हो सकते हैं। इसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते।
आज निकलेगी दिग्विजय यात्रा- अष्ट दिवसीय अनुष्ठान के पांचवे दिन मालथौन में आज दिग्विजय यात्रा निकाली जाएगी। अशोक जैन ने बताया कि सुबह 9 बजे आर्यिका संघ के प्रवचन एवं दोपहर 2 बजे दिग्विजय यात्रा निकाली जाएगी।